वेगो आजा रे सांवरिया फागुन महीनों

वेगो आजा रे सांवरिया फागुन महीनों आयो रे


ओ वेगो आजा रे सांवरिया, फागुन महीना आयो रे,
ओ वेगो आजा रे...

अरे मैं भी रंगीली, कान्हा तू भी रंगीलो,
आयो रे... आयो रे, कान्हा फागुन को मेलो।
ओ वेगो आजा रे सांवरिया, फागुन महीना आयो रे...

अंतरा 2:
सारी सखियाँ, म्हारी सारी सहेली,
खेल रही हैं रंगों से होली।
ओ वेगो आजा रे सांवरिया, फागुन महीना आयो रे...

अंतरा 3:
म्हारे तो मन में कान्हा, तू ही बस्यो है,
थारे संग खेलूंगी होली, ये मन मनायो है।
ओ वेगो आजा रे सांवरिया, फागुन महीना आयो रे...

अंतरा 4:
राधा भी आई, रुकमण रानी आई,
संग में आई, यशोदा माई।
ओ वेगो आजा रे सांवरिया, फागुन महीना आयो रे...


वेगो आजा रे सांवरिया फागुन महीनों आयो रे । #holi2025 #priyanjaykeshyambhajan #holibhajan #holi

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फागुन का महीना आया है, और सांवरिया के बिना होली की रौनक अधूरी है। मन बेकरार है, सांवरिया को बुलाता है कि जल्दी आओ, रंगों का यह मेला सज गया है। मैं भी रंगों में डूबी हूँ, और कान्हा, तू तो रंगीला है ही। यह फागुन का मेला तुझ बिना फीका है, जल्दी आकर इसे और रंगीन कर दे।

सारी सखियाँ, सारी सहेलियाँ रंग और गुलाल में डूबकर होली की मस्ती मना रही हैं। हर तरफ हँसी-खुशी का आलम है, पर सांवरिया के बिना यह उत्सव पूरा नहीं। मन में तो बस कान्हा बसे हैं, और उनके साथ ही होली खेलने की चाह है।

राधा भी आई है, रुक्मणी भी साथ है, और यशोदा माँ भी इस मेले की शोभा बढ़ा रही हैं। सब तैयार हैं, बस सांवरिया का इंतज़ार है। फागुन का यह रंग-भरा मौसम तुझ बिना सूना है, हे सांवरिया, जल्दी आओ और होली की इस मस्ती में शामिल हो जाओ।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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