गोरी हैं राधा प्यारी सांवरे बिहारी भजन
गोरी हैं राधा प्यारी सांवरे बिहारी भजन
गोरी हैं राधा प्यारी, सांवरे बिहारी,
युगल छवि पै जाऊँ बलिहारी...
अंतरा 1:
भोली सी राधा प्यारी, अति सुकुमारी,
उतने ही टेढ़े हैं बांके बिहारी।
अंतरा 2:
बरसाना धाम जिनका, ऊँची अटारी,
रज-भूषण हैं राधारमण बिहारी।
अंतरा 3:
चाँदनी सी राधा प्यारी, चंदा से बिहारी,
दिव्य छटा पर मैं तो सुध-बुध हारी।
युगल छवि पै जाऊँ बलिहारी...
अंतरा 1:
भोली सी राधा प्यारी, अति सुकुमारी,
उतने ही टेढ़े हैं बांके बिहारी।
अंतरा 2:
बरसाना धाम जिनका, ऊँची अटारी,
रज-भूषण हैं राधारमण बिहारी।
अंतरा 3:
चाँदनी सी राधा प्यारी, चंदा से बिहारी,
दिव्य छटा पर मैं तो सुध-बुध हारी।
बलिहारी | BALIHARI | New Bhajan 2025 #divyadeviji prashant krishna chaturvedi #bhakti #bhajan
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Name of Bhajan : BALIHARI
Project : PKC Events & Management co.
Produced By : Shri Govind Bhardwaj Ji
Co-Produced By: Shri Krishna Kumar Chaturvedi
Singer🎙: Divya Devi Ji
Lyrics✍ & Composition: Prashant Krishna Chaturvedi
फागुन का महीना आया है, और सांवरिया के बिना होली की रौनक अधूरी है। मन बेकरार है, सांवरिया को बुलाता है कि जल्दी आओ, रंगों का यह मेला सज गया है। मैं भी रंगों में डूबी हूँ, और कान्हा, तू तो रंगीला है ही। यह फागुन का मेला तुझ बिना फीका है, जल्दी आकर इसे और रंगीन कर दे।
सारी सखियाँ, सारी सहेलियाँ रंग और गुलाल में डूबकर होली की मस्ती मना रही हैं। हर तरफ हँसी-खुशी का आलम है, पर सांवरिया के बिना यह उत्सव पूरा नहीं। मन में तो बस कान्हा बसे हैं, और उनके साथ ही होली खेलने की चाह है।
राधा भी आई है, रुक्मणी भी साथ है, और यशोदा माँ भी इस मेले की शोभा बढ़ा रही हैं। सब तैयार हैं, बस सांवरिया का इंतज़ार है। फागुन का यह रंग-भरा मौसम तुझ बिना सूना है, हे सांवरिया, जल्दी आओ और होली की इस मस्ती में शामिल हो जाओ।
यह भजन भी देखिये
जो हारे को जीत दिलाये वो खाटू वाला
खाटू वाले मनै बुला ले बाबा तेरे धाम
मेरे लिए बाबा तूने क्या क्या नहीं भजन
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Project : PKC Events & Management co.
Produced By : Shri Govind Bhardwaj Ji
Co-Produced By: Shri Krishna Kumar Chaturvedi
Singer🎙: Divya Devi Ji
Lyrics✍ & Composition: Prashant Krishna Chaturvedi
फागुन का महीना आया है, और सांवरिया के बिना होली की रौनक अधूरी है। मन बेकरार है, सांवरिया को बुलाता है कि जल्दी आओ, रंगों का यह मेला सज गया है। मैं भी रंगों में डूबी हूँ, और कान्हा, तू तो रंगीला है ही। यह फागुन का मेला तुझ बिना फीका है, जल्दी आकर इसे और रंगीन कर दे।
सारी सखियाँ, सारी सहेलियाँ रंग और गुलाल में डूबकर होली की मस्ती मना रही हैं। हर तरफ हँसी-खुशी का आलम है, पर सांवरिया के बिना यह उत्सव पूरा नहीं। मन में तो बस कान्हा बसे हैं, और उनके साथ ही होली खेलने की चाह है।
राधा भी आई है, रुक्मणी भी साथ है, और यशोदा माँ भी इस मेले की शोभा बढ़ा रही हैं। सब तैयार हैं, बस सांवरिया का इंतज़ार है। फागुन का यह रंग-भरा मौसम तुझ बिना सूना है, हे सांवरिया, जल्दी आओ और होली की इस मस्ती में शामिल हो जाओ।
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Author - Saroj Jangir
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