जिनि पाया तिनि सूगह ग़ह्या रसनाँ मीनिंग
जिनि पाया तिनि सूगह ग़ह्या रसनाँ लागी स्वादि मीनिंग
जिनि पाया तिनि सूगह ग़ह्या , रसनाँ लागी स्वादि।
रतन निराला पाईया, जगत ढंढाल्या बादि॥
रतन निराला पाईया, जगत ढंढाल्या बादि॥
Jini Paya Tini Sugah Gaya, Rasna Laagi Swadi,
Ratan Nirala Paiya, Jagat Dhandhaalya Baadi.
- जिनि पाया - जिसने पाया।
- सूगह - अच्छे से।
- रसनाँ - जिव्हा, जीभ, वाणी।
- ग़ह्या- पकड़ा।
- स्वादि - स्वाद लग जाना, ध्यान लग जाना।
- रतन निराला - निराला रत्न।
- पाईया - प्राप्त किया।
- ढंढाल्या - ढूंढा, खोजा।
- बादि- व्यर्थ।
जिस व्यक्ति ने भक्ति को प्राप्त कर लिया है उसकी जिव्हा पर भक्ति का रस लग गया है। वे पूर्ण परमात्मा से एकाकार हो जाते हैं। जिसने ब्रह्म रूपी अनमोल रत्न को प्राप्त कर लिया है उसे समझो की अनमोल रतन मिल गया है अब उसे इस जगत में कुछ भी प्राप्त करना व्यर्थ है। अब उसे इस जगत से कुछ भी प्राप्त करना शेष नहीं बच जाता है। अलौकिक ब्रह्म का स्वाद अद्भुद है जिसे ग्रहण करने के बाद कुछ भी शेष नहीं बचता है। भाव है की भक्ति रस समस्त सांसारिक सुखों से भी अधिक मूल्यावान है। जगत के समस्त व्यवहार क्षणिक होते हैं।
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