तू ही है कृष्णा तू ही है रामा कृष्णा भजन
तू ही है कृष्णा तू ही है रामा कृष्णा भजन
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
रचनाकार, सृष्टि तेरी
पालनहार, सृष्टि तेरी
रचनाकार, सृष्टि तेरी
पालनहार, सृष्टि तेरी
तू ही संहारक, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही गुरु है, तू ही सखा है
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही गुरु है, तू ही सखा है
तू ही मेरा मालिक, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
जप ना जानूं, तप ना जानूं
विधि ना जानूं, रीति ना जानूं
जप ना जानूं, तप ना जानूं
विधि ना जानूं, रीति ना जानूं
बस तुझे जानूं, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
शरण में आया, प्रभु संभालो
दीनदयाल, मुझे अपना लो
शरण में आया, प्रभु संभालो
दीनदयाल, मुझे अपना लो
तुझमें समाऊं, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा
तू ही है कृष्णा
तू ही है कृष्णा।
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
रचनाकार, सृष्टि तेरी
पालनहार, सृष्टि तेरी
रचनाकार, सृष्टि तेरी
पालनहार, सृष्टि तेरी
तू ही संहारक, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही गुरु है, तू ही सखा है
तू ही माता, तू ही पिता है
तू ही गुरु है, तू ही सखा है
तू ही मेरा मालिक, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
जप ना जानूं, तप ना जानूं
विधि ना जानूं, रीति ना जानूं
जप ना जानूं, तप ना जानूं
विधि ना जानूं, रीति ना जानूं
बस तुझे जानूं, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा।
शरण में आया, प्रभु संभालो
दीनदयाल, मुझे अपना लो
शरण में आया, प्रभु संभालो
दीनदयाल, मुझे अपना लो
तुझमें समाऊं, मेरे भगवाना
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा, तू ही है रामा
तू ही शिव शंकर, तू ही हनुमाना।
तू ही है कृष्णा
तू ही है कृष्णा
तू ही है कृष्णा।
Tu hi hai Krishna, Tu hi hai Rama...
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परमात्मा एक ही है, जो कृष्ण के रूप में गोपियों संग रास रचाता है, राम के रूप में मर्यादा पुरुषोत्तम बनता है, शिव शंकर के रूप में संसार का कल्याण करता है, और हनुमान के रूप में भक्ति और शक्ति का प्रतीक है। वह सृष्टि का रचयिता है, उसका पालन करता है, और उसी में सबका संहार होता है। वह सृष्टि का आधार है, हर रूप में वही समाया है।
वह माता है, पिता है, गुरु है, और सखा भी। वह हर रिश्ते का मालिक है, हर प्राणी का स्वामी। जप, तप, विधि, या रीति का ज्ञान हो या न हो, बस उसका नाम, उसकी भक्ति ही पर्याप्त है। उसे जान लेना ही सच्चा ज्ञान है। उसकी शरण में जो आता है, उसे वह अपनाता है। दीनदयाला वह सबको संभालता है, अपने में समा लेता है। मन, आत्मा, और जीवन सब उसी में समर्पित हो जाता है। वह कृष्ण है, राम है, शिव है, हनुमान है—हर रूप में वही एक परम सत्य है, जो भक्त के हृदय में बसता है।
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वह माता है, पिता है, गुरु है, और सखा भी। वह हर रिश्ते का मालिक है, हर प्राणी का स्वामी। जप, तप, विधि, या रीति का ज्ञान हो या न हो, बस उसका नाम, उसकी भक्ति ही पर्याप्त है। उसे जान लेना ही सच्चा ज्ञान है। उसकी शरण में जो आता है, उसे वह अपनाता है। दीनदयाला वह सबको संभालता है, अपने में समा लेता है। मन, आत्मा, और जीवन सब उसी में समर्पित हो जाता है। वह कृष्ण है, राम है, शिव है, हनुमान है—हर रूप में वही एक परम सत्य है, जो भक्त के हृदय में बसता है।
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Author - Saroj Jangir
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