ज़रा जल्दी से आजा साँवरिया कृष्णा भजन
ज़रा जल्दी से आजा साँवरिया कृष्णा भजन
ज़रा जल्दी से आजा साँवरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
जैसे मीरा ने सब कुछ भुलाया,
प्रभु चरणों में ध्यान लगाया।
मोहन मुझ पर भी डालो नज़रिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
तुमने राधा से प्रीत लगाई,
उसके बंधन में बंध गए कन्हाई।
राधा सुनती थी प्यारी बाँसुरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
तुमने मधुबन में रास रचाया,
संग गवालों के माखन चुराया।
सारी पागल थी गोकुल नगरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
जैसे मीरा ने सब कुछ भुलाया,
प्रभु चरणों में ध्यान लगाया।
मोहन मुझ पर भी डालो नज़रिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
तुमने राधा से प्रीत लगाई,
उसके बंधन में बंध गए कन्हाई।
राधा सुनती थी प्यारी बाँसुरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
तुमने मधुबन में रास रचाया,
संग गवालों के माखन चुराया।
सारी पागल थी गोकुल नगरिया,
तेरी भक्ति की ओढ़ी चुनरिया।
ज़रा जल्दी से आजा।
कृष्ण भजन ।। जरा जल्दी से आजा सांवरिया || Zara jaldi se aaja sanwariya
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Title - Zara jaldi se aaja sanwariya
Artist - Vanshika Sharma
Singer - Aarti
Banjo / Keyboard - Naresh Pahal
मन में कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम और तड़प है। जीवन को उनकी भक्ति की चुनरिया ओढ़कर एक नई पहचान और शांति मिलती है। जैसे मीरा ने संसार के सारे बंधन, मोह और सांसारिक सुख-दुख को भुलाकर केवल प्रभु के चरणों में अपने मन को लगा दिया, वैसे ही यह मन भी पूरी तरह समर्पित हो गया है। हर सांस, हर भावना में कृष्ण के दर्शन की चाह है और उनकी कृपा की प्रतीक्षा है।
कृष्ण और राधा का प्रेम, उनकी बाँसुरी की मधुर धुन, और राधा का उस धुन में खो जाना, यह सब भक्ति के सबसे सुंदर स्वरूप को दर्शाते हैं। कृष्ण की भक्ति में डूबा मन उसी प्रेम और समर्पण की अनुभूति चाहता है, जो राधा ने अपने कन्हैया के लिए महसूस किया। कृष्ण का मधुबन में रास रचाना, गोकुल की गलियों में माखन चुराना, और ग्वाल-बालों के संग उनकी बाल-लीलाएँ, सब कुछ जीवन को आनंद और भक्ति से भर देता है।
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सांवरिया नाम तुम्हारो लागे मन जीते प्यारा
श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Title - Zara jaldi se aaja sanwariya
Artist - Vanshika Sharma
Singer - Aarti
Banjo / Keyboard - Naresh Pahal
मन में कृष्ण के प्रति गहरा प्रेम और तड़प है। जीवन को उनकी भक्ति की चुनरिया ओढ़कर एक नई पहचान और शांति मिलती है। जैसे मीरा ने संसार के सारे बंधन, मोह और सांसारिक सुख-दुख को भुलाकर केवल प्रभु के चरणों में अपने मन को लगा दिया, वैसे ही यह मन भी पूरी तरह समर्पित हो गया है। हर सांस, हर भावना में कृष्ण के दर्शन की चाह है और उनकी कृपा की प्रतीक्षा है।
कृष्ण और राधा का प्रेम, उनकी बाँसुरी की मधुर धुन, और राधा का उस धुन में खो जाना, यह सब भक्ति के सबसे सुंदर स्वरूप को दर्शाते हैं। कृष्ण की भक्ति में डूबा मन उसी प्रेम और समर्पण की अनुभूति चाहता है, जो राधा ने अपने कन्हैया के लिए महसूस किया। कृष्ण का मधुबन में रास रचाना, गोकुल की गलियों में माखन चुराना, और ग्वाल-बालों के संग उनकी बाल-लीलाएँ, सब कुछ जीवन को आनंद और भक्ति से भर देता है।
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श्रृंगार तेरा देखा तो तुझ में खो गया हूँ
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Author - Saroj Jangir
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