जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई

जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई


जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।
देवकी माता जग के दाता।
कर ले मेरी सुनाई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।

खुली हतकड़ी पैरों बेड़ी, माया श्याम फैलाई।
द्वार खुले जो पहरेदार थे, नींद सभी आई।
वासुदेव ले चले कुँवर को।
मन में खुशी मनाई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।

बादल गरजे बिजली चमके, बारिश मूसलधार पड़े।
वासुदेव जी सोचे मन में, क्यों कर जमना बीच बड़े।
हे ईश्वर तेरी लीला न्यारी।
तुम सच्चे रघुराई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।

त्रिलोक का ध्यान लगाकर, जल के भीतर आन बड़ा।
जमना माई चढ़के ध्याई, राजा सोचे खड़ा खड़ा।
कृष्ण माया पैर फैलाया।
चरण छू नीचे आई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।

नंद महल में जाकर देखा, सोवे थी नंद रानी।
लड़का देके लड़की लेली, भयो नैन बीच पानी।
दुखड़ा भरता है सब करता।
फिर मथुरा देई दिखाई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।

कारागृह के बीच गए जब, भोर भये पक्षी जागे।
रोने की आवाज़ सुनी तो, पहरेदार उठ कर भागे।
कंस अन्यायी दया न आई।
लड़की तुरत मगाई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।

कीर्तन मंडल तेरे सहारे, वाणी होती सुनी मने।
मारण वाला पैदा हो गया, गोकुल में नंदलाल तने।
नाम बिहारी कर तैयारी।
अब क्यों देर लगाई।
जन्म लियो जब श्याम ने भादो अष्टमी आई।


Janm Liyo Jab Shyam Ne | कृष्ण जन्माष्टमी का स्पेशल भजन | हरीश मगन | Krishna Janmashtami Bhajan 2024

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कृष्ण जन्म की यह कथा दिव्यता, चमत्कार और गहरे आध्यात्मिक रहस्यों से भरी हुई है। भादों माह की अष्टमी की रात जब श्रीकृष्ण का जन्म हुआ, उस समय चारों ओर एक अलौकिक वातावरण था। देवकी माता के कारागार में जन्म लेते ही, परमात्मा की माया ने अपना अद्भुत खेल दिखाना शुरू कर दिया। हाथों की हथकड़ियाँ और पैरों की बेड़ियाँ अपने आप खुल गईं, पहरेदार गहरी नींद में सो गए और कारागार के द्वार स्वतः खुल गए।

वासुदेव जी के मन में अपने पुत्र को बचाने की चिंता थी, लेकिन कृष्ण की माया ने हर बाधा को सरल बना दिया। घनघोर बारिश, बिजली की चमक और गगनभेदी बादलों के बीच वासुदेव जी ने अपने बालकृष्ण को टोकरी में रखा और यमुना पार करने के लिए निकल पड़े। यमुना का जल भी श्रीकृष्ण के चरणों का स्पर्श पाते ही शांत हो गया और मार्ग बन गया। प्रकृति भी श्रीकृष्ण के स्वागत में झुक गई, जिससे वासुदेव जी सुरक्षित गोकुल पहुँच सके।

गोकुल में नंद के घर आनंद का वातावरण था, नंद रानी अपने शिशु के साथ सो रही थीं। वासुदेव जी ने वहाँ कृष्ण को छोड़कर यशोदा की कन्या को ले लिया। मथुरा लौटते समय भी सब कुछ सहजता से हो गया। जब पहरेदारों ने रोने की आवाज़ सुनी, तो वे जाग गए और कंस को सूचना दी। कंस ने जैसे ही कन्या को मारना चाहा, वह आकाश में चली गई और कंस को उसके विनाश का संदेश दे गई।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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