बिन पिए नशा हो जाता है जो राधे-राधे गाता है

बिन पिए नशा हो जाता है जो राधे-राधे गाता है


 बिन पिए नशा हो जाता है,
जो राधे-राधे गाता है।

जिसके अंदर मनभाव बढ़ा,
वही ऊँची अटारी की सीढ़ी चढ़ा।
उसे गोपी बना लिया जाता है... राधे x8
जो राधे-राधे गाता है,
बिन पिए नशा...

मेरा बरसाना रंगीला है,
सब राधा नाम की लीला है।
भगवान भी चरण दबाता है... राधे x8
जो राधे-राधे गाता है,
बिन पिए नशा...

दुनिया के जिसने ताने सहे,
अखियों से प्रेम के आँसू बहे।
उसको जीना आ जाता है... राधे x8
जो राधे-राधे गाता है,
बिन पिए नशा...

रस पीने का तू इरादा तो कर,
मेरे बाँके बिहारी से वादा तो कर।
वो ख़ुद ही पिलाने आता है... राधे x8
जो राधे-राधे गाता है,
बिन पिए नशा...

हरिदासी करे जो मनमानी,
गोपाली कहे जो न मानी।
वो अंत समय पछताता है... राधे x8
जो राधा नाम नहीं गाता है,
बिन पिए नशा...

पीए संत रसिक ब्रजवासी भी,
गोपाली, पूनम, हरिदासी भी।
वो रस का पागल हो जाता है... राधे x8
जो राधे-राधे गाता है,
जो राधे-राधे गाता है।
उसको जीना आ जाता है,
ना मरने से घबराता है।
बिन पिए नशा...


राधा नाम का नशा किसे चढ़ता है - बिन पिए नशा हो जाता है जो राधे राधे गाता है | बरसाना धाम | #बाँसुरी

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☛ Singer Name: बृज रस अनुरागी पूनम दीदी (Sadhvi Purnima Ji)

राधा नाम का स्मरण अपने आप में एक अनोखा नशा है, जिसे पाने के लिए किसी बाहरी साधन की आवश्यकता नहीं होती। यह नाम हृदय में उतरते ही भीतर ऐसी मधुरता और आनंद भर देता है, जो किसी भी सांसारिक सुख या नशे से कहीं अधिक गहरा और स्थायी है। राधा नाम का जप मनुष्य के अंतर्मन को निर्मल कर देता है, उसमें प्रेम और भक्ति की ऐसी लहरें उठती हैं कि साधारण जीवन भी दिव्य अनुभवों से भर जाता है।

जिसके हृदय में राधा के प्रति प्रेम और भक्ति का भाव जाग्रत होता है, वह सांसारिक ऊँचाइयों को सहजता से प्राप्त कर लेता है। उसका मन संसार की छोटी-छोटी बातों से ऊपर उठ जाता है और वह आत्मिक शांति की सीढ़ियाँ चढ़ने लगता है। राधा का नाम जपते-जपते साधक की स्थिति ऐसी हो जाती है कि वह स्वयं को गोपी के भाव में अनुभव करने लगता है, जिसमें केवल प्रेम, समर्पण और आनंद ही शेष रह जाता है।

बरसाना की भूमि का रंग और राधा नाम की लीला इतनी अद्भुत है कि वहाँ स्वयं भगवान भी अपने भक्तों की सेवा करने में आनंद अनुभव करते हैं। राधा नाम का प्रभाव इतना गहरा है कि जो भी इसे अपनाता है, उसके जीवन में प्रेम, माधुर्य और दिव्यता का संचार हो जाता है। यह नाम जीवन के हर दुख, हर ताने और हर कठिनाई को प्रेम में बदल देता है। प्रेम के आँसू बहाने वाला ही सच्चे अर्थों में जीना सीख जाता है, क्योंकि उसके जीवन में अब केवल राधा का माधुर्य और कृष्ण का प्रेम ही शेष रह जाता है।

राधा नाम का रस पीने के लिए केवल एक सच्चे इरादे और वचन की आवश्यकता है। जब मनुष्य अपने आप को राधा-कृष्ण के चरणों में समर्पित कर देता है, तो स्वयं भगवान उसकी सुध लेने आ जाते हैं और उसे भक्ति का अमृत चखा देते हैं। यह रस संतों, ब्रजवासियों और गोपियों के जीवन का आधार है, जो इसे पीकर प्रेम और भक्ति में डूब जाते हैं।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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