अवध से आज मिथला में लुटाने प्यार भजन
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये है।
सजे सेहरे में देखो,
साँवले सरकार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
भ्रमर से काली काली तिखरी,
घूँघर वाली अलकों पर,
छटा छहराते मोरी की,
छयल दिलदार आये हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
जमीं का ज़र्रा ज़र्रा है,
नहाया चाँदनी में आज,
के मिथला कास पूनम,
चंदा चार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
भले दाता जगत के हैं,
शिरोमणि दानियों में हैं,
ग्रहीता आज बन के ये,
जनक दरबार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
ऋचाएं वेद की प्रताप,
जो सुन कर के अघाते हैं,
वे सुनने रस भरी गारी ,
यहाँ ससुरार आये है
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये है।
सजे सेहरे में देखो,
साँवले सरकार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
लुटाने प्यार आये हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये है।
सजे सेहरे में देखो,
साँवले सरकार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
भ्रमर से काली काली तिखरी,
घूँघर वाली अलकों पर,
छटा छहराते मोरी की,
छयल दिलदार आये हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
जमीं का ज़र्रा ज़र्रा है,
नहाया चाँदनी में आज,
के मिथला कास पूनम,
चंदा चार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
भले दाता जगत के हैं,
शिरोमणि दानियों में हैं,
ग्रहीता आज बन के ये,
जनक दरबार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
ऋचाएं वेद की प्रताप,
जो सुन कर के अघाते हैं,
वे सुनने रस भरी गारी ,
यहाँ ससुरार आये है
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये है।
सजे सेहरे में देखो,
साँवले सरकार आए हैं,
अवध से आज मिथला में,
लुटाने प्यार आये हैं।
पूज्य राजन जी- अवध से आज मिथिला में लूटाने प्यार आये हैं। संपर्क सूत्र- +919831877060, Avadh Se Aaj Mithala Mein,
Lutaane Pyaar Aaye Hain,
Avadh Se Aaj Mithala Mein,
Lutaane Pyaar Aaye Hai.
Saje Sehare Mein Dekho,
Saanvale Sarakaar Aae Hain,
Avadh Se Aaj Mithala Mein,
Lutaane Pyaar Aaye Hain.
अवध से आज मिथला में, लुटाने प्यार आये हैं यह मनमोहक दृश्य उस पावन बेला का चित्रण करता है जब प्रेम और त्याग का संगम एक जगह होता है। अवध की पावन धरती से लेकर मिथला की पावन भूमि तक एक स्नेहिल यात्रा होती है, जिसमें प्रेम की उस गहराई को मनाया जाता है जो सीमाओं से परे जा कर मन और आत्मा को जोड़ देती है। उस साँवले सरकार का आना जैसे एक दिव्य अलौकिक अनुभव हो, जहां हर ज़रिया प्रेम से संगीतित हो जाता है और जो पूर्व जन्मों के बंधन तोड़कर नई उम्मीदें जगाता है। सज-धज कर आए इस पावन सन्दर्भ में प्रकृति की हर सौंदर्यता भी प्रतीत होती है जैसे प्रेम की छटा से सज-धज उठी हो।
