जैसी मुष तें नीकसै तैसी चालै नाहिं मीनिंग

जैसी मुष तें नीकसै तैसी चालै नाहिं मीनिंग

जैसी मुष तें नीकसै, तैसी चालै नाहिं।
मानिष नहीं ते स्वान गति, बाँध्या जमपुर जाँहिं॥
Jaisi Mukh Te Neekase, Taisi Chale Nahi,
Manikh Nahi Te Swan Gati, Bandhya Jampur Jahi.

जैसी मुष तें नीकसै : जैसा व्यक्ति कहता है (जो आदर्श हैं)
तैसी चालै नाहिं : वैसा करता नहीं है (आचरण में नहीं है)
मानिष नहीं ते स्वान गति : वह मनुष्य नहीं है, वह तो कुत्ता है, कुत्ते की भाँती से है.
बाँध्या जमपुर जाँहिं : बंधकर यमलोक/यमपुर जाता है.
जैसी : जिस प्रकार की, जैसी.
मुष तें : मुख से.
नीकसै : निकलती है, बोलता है.
तैसी चालै नाहिं : वैसा चलता नहीं है.
मानिष नहीं : वह मनुष्य नहीं है.
कबीर साहेब की वाणी है की जो व्यक्ति अपनी कथनी और करनी में भेद रखता है, जैसा कहता है वैसा करता नहीं है वह मनुष्य नहीं अपितु स्वान (कुत्ता) होता है. जैसे कुत्ते को हेय माना जाता है, इसी प्रकार से ऐसा व्यक्ति दुत्कार के काबिल होता है जो कहे कुछ और करे कुछ. ऐसे व्यक्ति को यमराज बांधकर अपने साथ लेकर जाता है.
भक्ति मार्ग में आगे बढ़ने के लिए सर्वप्रथम हमें अपनी कथनी और करनी का भेद समाप्त करना होगा. जो आदर्श हम कहते हैं, उसे अपने आचरण में उतारना आवश्यक होता है. आचरण में भिन्नता होने पर कल्याण संभव नहीं है.
कबीर के दोहे हिंदी भावार्थ/हिंदी अर्थ/ हिंदी मीनिंग सहित। श्रेणी : कबीर के दोहे हिंदी मीनिंग
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