जय जय पितर जी महाराज भजन
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
शरण पड्यो हूँ थारी ओ देवा,
रखियो लाज हमारी,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
आप ही रक्षक आप ही दाता,
आप ही खेवन हारे,
मैं मूरख हूँ कछु नहीं जाणूं,
आप ही हो रखवारे,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,
करने मेरी रखवारी,
हम सब जन हैं शरण आपकी,
है ये अरज गुज़ारी,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
देश और परदेश सब जगह,
आप ही करो सहाई,
काम पड़े पर नाम आपको,
लगे बहुत सुखदाई,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
भक्त सभी हैं शरण आपकी,
अपने सहित परिवार,
रक्षा करो आप ही सबकी,
रटूँ मैं बारम्बार,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
शरण पड्यो हूँ थारी ओ देवा,
रखियो लाज हमारी,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
पितर जी की आरती
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़्यो हूं थारी ।
शरण पड़्यो हूम थारी बाबा, शरण पड़्यो हूं थारी ।।
आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे ।
मैं मूरख हूं कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे ।।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी ।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी ।।
देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई ।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई ।।
भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवारा ।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार ।।
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
शरण पड्यो हूँ थारी ओ देवा,
रखियो लाज हमारी,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
आप ही रक्षक आप ही दाता,
आप ही खेवन हारे,
मैं मूरख हूँ कछु नहीं जाणूं,
आप ही हो रखवारे,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी,
करने मेरी रखवारी,
हम सब जन हैं शरण आपकी,
है ये अरज गुज़ारी,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
देश और परदेश सब जगह,
आप ही करो सहाई,
काम पड़े पर नाम आपको,
लगे बहुत सुखदाई,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
भक्त सभी हैं शरण आपकी,
अपने सहित परिवार,
रक्षा करो आप ही सबकी,
रटूँ मैं बारम्बार,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
शरण पड्यो हूँ थारी ओ देवा,
रखियो लाज हमारी,
जय जय पितर जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी,
देवा, पितृ जी महाराज,
मैं शरण पड्यो हूँ थारी।
पितर जी की आरती
जय जय पितरजी महाराज, मैं शरण पड़्यो हूं थारी ।
शरण पड़्यो हूम थारी बाबा, शरण पड़्यो हूं थारी ।।
आप ही रक्षक आप ही दाता, आप ही खेवनहारे ।
मैं मूरख हूं कछु नहि जाणू, आप ही हो रखवारे ।।
आप खड़े हैं हरदम हर घड़ी, करने मेरी रखवारी ।
हम सब जन हैं शरण आपकी, है ये अरज गुजारी ।।
देश और परदेश सब जगह, आप ही करो सहाई ।
काम पड़े पर नाम आपको, लगे बहुत सुखदाई ।।
भक्त सभी हैं शरण आपकी, अपने सहित परिवारा ।
रक्षा करो आप ही सबकी, रटूं मैं बारम्बार ।।
Jai jai pitar ji maharaj mai saran padyo hu thari by vikash sharma
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पितर जी महाराज के चरणों में शरण पड़ते ही मन को अजीब शांति मिल जाती है, जैसे हर डर भाग खड़ा हो। वो रक्षक हैं, दाता हैं, खेवनहार बनकर हारे को पार लगाते हैं, मूरख को राह दिखाते हैं। हर घड़ी खड़े रहते हैं रखवारी करने को, देश-परदेश हर जगह सहारा देते हैं, नाम लेते ही सुख की लहर दौड़ जाती है। भक्त परिवार संग शरण में आते हैं, लाज बचाते हैं बार-बार।
सोचो ना, जीवन की हर मुश्किल में बस उनका नाम पुकार लो, तो कितना हल्का लगता है मन। रखवारे बनकर अपनों की रक्षा करते हैं, अरज सुनते हैं गुजारी। ये बंधन इतना मजबूत है कि दिल कहता है बस यहीं रह लूँ, हर सांस में जयकारा गूंजे। शरण में पड़कर मिली ये शांति जीवन भर साथ निभाती है।
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