तूने जो हाथ थामा मंजिल की फिक्र क्या है
तूने जो हाथ थामा मंजिल की फिक्र क्या है
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है,
तेरे ही साथ चलना,
तेरे ही साथ चलना,
तेरी ही सारी राहें,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
तेरी दया से बाबा,
कारोबार मेरा चलता,
सर पे जो हाथ तेरा,
परिवार मेरा पलता,
तुझे दिल में है बसाया,
तुझे दिल में है बसाया,
बाबा तू ही हर जगह है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
चरणों में बैठ करके,
सूरत तेरी निहारूं,
प्यारा सा लागे कितना,
बाबा नज़रें मैं उतारूं,
कहीं और दिल ना लगता,
कहीं और दिल ना लगता,
नज़रों ने जो ठगा है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
तुझसे मैं क्या मांगूं,
औकात क्या है मेरी,
देता तू खुद ब खुद ही,
खुशकिस्मती है मेरी,
देख तेरी कृपा को,
देख तेरी कृपा को,
मेरा अश्क ये बहा है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
आकाश का सहारा,
एक तू ही लखदातारी,
जीवन की डोर सौंपी,
तेरे हाथों में मुरारी,
मतलब से सारे रिश्ते,
मतलब से सारे रिश्ते,
एक तू ही तो सगा है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है,
तेरे ही साथ चलना,
तेरे ही साथ चलना,
तेरी ही सारी राहें,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
मंजिल की फिक्र क्या है,
तेरे ही साथ चलना,
तेरे ही साथ चलना,
तेरी ही सारी राहें,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
तेरी दया से बाबा,
कारोबार मेरा चलता,
सर पे जो हाथ तेरा,
परिवार मेरा पलता,
तुझे दिल में है बसाया,
तुझे दिल में है बसाया,
बाबा तू ही हर जगह है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
चरणों में बैठ करके,
सूरत तेरी निहारूं,
प्यारा सा लागे कितना,
बाबा नज़रें मैं उतारूं,
कहीं और दिल ना लगता,
कहीं और दिल ना लगता,
नज़रों ने जो ठगा है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
तुझसे मैं क्या मांगूं,
औकात क्या है मेरी,
देता तू खुद ब खुद ही,
खुशकिस्मती है मेरी,
देख तेरी कृपा को,
देख तेरी कृपा को,
मेरा अश्क ये बहा है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
आकाश का सहारा,
एक तू ही लखदातारी,
जीवन की डोर सौंपी,
तेरे हाथों में मुरारी,
मतलब से सारे रिश्ते,
मतलब से सारे रिश्ते,
एक तू ही तो सगा है,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है,
तेरे ही साथ चलना,
तेरे ही साथ चलना,
तेरी ही सारी राहें,
तूने जो हाथ थामा,
मंजिल की फिक्र क्या है।।
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Author - Saroj Jangir
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