राधारानी अलबेली सरकार भजन

राधारानी अलबेली सरकार राधाजी भजन

 
राधारानी अलबेली सरकार भजन

कृष्णा, कृष्णा,
राधे, राधे,
नन्द गाँव रावल बरसाना,
धूम मची है भारी,
बृज मंडल में प्रगट भई है,
श्री राधिका प्यारी,
नन्द गांव रावल बरसाना,
धूम मची है भारी,
बृजमंडल में प्रगट भई है,
श्री राधिका प्यारी,
बधाई, गावे ब्रिज नारी,
बधाई, गावे बृज नारी।

बृषभानु लली जैसे, कुसम कलि,
कीरत की सुता, मिश्री की डली,
देव दनुज किन्नर गंधर्व वारे,
मोतियन थारी,
बृजमंडल में प्रगट भई है,
श्री राधिका प्यारी,
बधाई, गावे ब्रिज नारी,
बधाई, गावे बृज नारी।

बाबा दानी तप धारी है,
दोनों को ख़ुशियाँ भारी हैं,
सुखदा और महिभान के,
आँगन गूँज रही किलकारी,
बृजमंडल में प्रगट भई है,
श्री राधिका प्यारी,
बधाई, गावे ब्रिज नारी,
बधाई, गावे बृज नारी।

नन्द गांव के ग्वालों की टोली,
संग में ग्वालन, भोली भोली,
आय देन बधाई अनुमप,
दे मधुर मधुर दे गारी,
बृजमंडल में प्रगट भई है,
श्री राधिका प्यारी,
बधाई, गावे ब्रिज नारी,
बधाई, गावे बृज नारी।

भजन श्रेणी : कबीर के दोहे हिंदी मीनिंग

राधा अष्टमी के दिन जरूर सुने ये मधुर भजन | राधारानी अलबेली सरकार | बृज रसिक दीपा दीदी #Saawariya

Nand Gaanv Raaval Barasaana,
Dhum Machi Hai Bhaari,
Brj Mandal Mein Pragat Bhi Hai,
Shri Raadhika Pyaari,
Nand Gaanv Raaval Barasaana,
Dhum Machi Hai Bhaari,
Brjamandal Mein Pragat Bhi Hai,
Shri Raadhika Pyaari,
Badhai, Gaave Brij Naari,
Badhai, Gaave Brj Naari.
Album - Radha Rani Albeli Sarkar
Song : Radha Rani Albeli Sarkar
Singer : Deepa Didi
Music : Bijender Singh (Chauhan)
Writer : DEVENDER DUTT ANUPAM
Parent Label(Publisher) - Shubham Audio Video Private Limited.
#Editor : Gaurang Bhasin
 
नंदगांव और बरसाना के इन पावन स्थानों पर जैसे कोई दिव्य ज्योति जगमगा उठती है जब श्री राधिका का प्रगट होना होता है। पूरा ब्रज मंडल उल्लास से भर जाता है, नारी गीत गाती हैं बधाई के स्वरों में, और वातावरण में मिठास घुल जाती है। वृषभानु लली का अवतरण तो बस फूलों सी कोमलता लाता है, देवता गंधर्व सब मोतियों सी चमक बिखेरते हैं। यह खुशी इतनी गहरी है कि हर कोना गूंज उठता है किलकारियों से, सुख और आनंद की लहरें फैल जाती हैं।

​ग्वालों की टोली भोली भाली सखियों संग आती है, मधुर गान लेकर बधाई देती है। बाबा दानी तपस्वी के आंगन में यह प्रसंग जीवन को नई रंगत देता है, जहां हर सांस प्रेम और समर्पण से लबरेज़ हो जाती है। कीर्तन की सुता मिश्री डली सी राधिका सबके हृदय में बस जाती है, और ब्रज की नारियां गा-गाकर उत्सव मनाती हैं। यह पल हमें सिखाते हैं कि सच्ची भक्ति में दान, तप और खुशी का संगम होता है, जो आत्मा को झंकृत कर देता है। 
 
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