तुम शरणाई आया ठाकुर आया भजन
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
उतर गयो मेरे मन का शंसा,
जब ते दरसनु पाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
अनबोलत मेरी बिरथा जानी,
अनबोलत मेरी बिरथा जानी,
अपना नाम जपाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
दुःख नाटे सुख सहज समाए,
आनंद आनंद गुण गाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
बाँह पकड़ कढ़ लीन्हे अपने,
गृह अंध कूप ते माया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
कहो नानक गुरु बंधन काटे,
कहो नानक गुरु बंधन काटे,
बिछुरत आन मिलाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
उतर गयो मेरे मन का शंसा,
जब ते दरसनु पाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
तुम शरणाई आया,
उतर गयो मेरे मन का शंसा,
जब ते दरसनु पाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
अनबोलत मेरी बिरथा जानी,
अनबोलत मेरी बिरथा जानी,
अपना नाम जपाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
दुःख नाटे सुख सहज समाए,
आनंद आनंद गुण गाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
बाँह पकड़ कढ़ लीन्हे अपने,
गृह अंध कूप ते माया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
कहो नानक गुरु बंधन काटे,
कहो नानक गुरु बंधन काटे,
बिछुरत आन मिलाया, ठाकुर,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया,
उतर गयो मेरे मन का शंसा,
जब ते दरसनु पाया,
तुम शरणाई आया ठाकुर,
तुम शरणाई आया।
भजन श्रेणी : पंजाबी भजन /शबद
Thakur Tum Sarnai Aaya (Shabad) || Maithili Thakur, Rishav Thakur, Ayachi Thakur
Thakur Tum Sarnai Aaya (Shabad) || Maithili Thakur, Rishav Thakur, Ayachi Thakur
Tum Sharanai Aaya Thaakur,
Tum Sharanai Aaya,
Utar Gayo Mere Man Ka Shansa,
Jab Te Darasanu Paaya,
Tum Sharanai Aaya Thaakur,
Tum Sharanai Aaya.
Tum Sharanai Aaya,
Utar Gayo Mere Man Ka Shansa,
Jab Te Darasanu Paaya,
Tum Sharanai Aaya Thaakur,
Tum Sharanai Aaya.
तुम शरणाई आया ठाकुर
तुम शरणाई आया ठाकुर
तुम शरणाई आया ठाकुर ॥
उतरि गइओ मेरे मन का संसा,
जब ते दरसनु पाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
अनबोलत मेरी बिरथा जानी
अपना नामु जपाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
दुख नाठे सुख सहजि समाए,
अनद अनद गुण गाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
बाह पकरि कढि लीने अपुने,
ग्रिह अंध कूप ते माइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
कहु नानक गुरि बंधन काटे,
बिछुरत आनि मिलाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
तुम शरणाई आया ठाकुर
तुम शरणाई आया ठाकुर ॥
उतरि गइओ मेरे मन का संसा,
जब ते दरसनु पाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
अनबोलत मेरी बिरथा जानी
अपना नामु जपाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
दुख नाठे सुख सहजि समाए,
अनद अनद गुण गाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
बाह पकरि कढि लीने अपुने,
ग्रिह अंध कूप ते माइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
कहु नानक गुरि बंधन काटे,
बिछुरत आनि मिलाइआ ॥
तुम शरणाई आया ठाकुर
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Author - Saroj Jangir
दैनिक रोचक विषयों पर में 20 वर्षों के अनुभव के साथ, मैं एक विशेषज्ञ के रूप में रोचक जानकारियों और टिप्स (भजन संग्रह ) साझा करती हूँ, मेरे इस ब्लॉग पर। मेरे लेखों का उद्देश्य सामान्य जानकारियों को पाठकों तक पहुंचाना है। मैंने अपने करियर में कई विषयों पर गहन शोध और लेखन किया है, जिनमें जीवन शैली और सकारात्मक सोच के साथ वास्तु भी शामिल है....अधिक पढ़ें। |
