ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी

ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी

ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी
गाँव महुआ में मारा तेजल पुजाया,
गोड़ी नीलड़ का असवारी,
बोलो भाई नीलड़ का असवारी।
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी,
कला-बला का जेर मिटा रिया,
हो कलयुग महिमा भारी।
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

उगाणी दिसा में थाको,
मुखड़ो विराजे,
आतुणी पीठ तिहारी,
बोलो भाई आतुणी पीठ तिहारी।
दूर-दूर से आवे यात्री,
बोले तो जय-जयकारी,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

लारे बैठा रामदेव जी,
जोड़े बैठी डाली,
बोलो भाई जोड़े बैठी डाली।
हरजी भाटी चरणों में माही,
चरणों का पुजारी,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

धरऊ दीसा में बजरंगबाला,
जाकी महिमा भारी,
बोलो भाई जाकी महिमा भारी।
डाकणियाँ रा फलसा काटे,
मार पड़े गोटा री,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

पूर्व दिशा में नीलड़ गोड़ी,
जीपे तेजाजी असवारी,
बोलो भाई जीपे तेजाजी असवारी।
कालो नाग भाला पे लपटियो,
जोड़े उबी पैमल नारी,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

सन्मुख थाके हरीयो नीमड़ो,
जीया की छाया भारी,
बोलो भाई जीया की छाया भारी।
छाया माहीं में बैठा यात्री,
सुख पावे नर-नारी,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

लंकाऊ दीसा में मांत झातला,
लंबा बाण चलारी,
बोलो भाई लंबा बाण चलारी।
चरणा माहीं भैरू गाजे,
कर-कर के खिलकारी,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

देबी लाल जी चंवर ढुलावे,
मोमन करे आरती थारी,
बोलो भाई करे आरती थारी।
मगनीराम धनघर को बोले,
लाज राखले मारी,
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।

(पुनरावृत्ति)
गाँव महुआ में मारा तेजल पुजाया,
गोड़ी नीलड़ का असवारी,
बोलो भाई नीलड़ का असवारी।
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी,
कला-बला का जेर मिटा रिया,
हो कलयुग महिमा भारी।
ऐसा मेरा तेजाजी उपकारी।।


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वीर तेजाजी की महिमा उस अनुपम शक्ति का प्रतीक है, जो राजस्थान की धरती पर भक्तों के हृदय में बसी है। गाँव महुआ में उनकी पूजा और नीलड़ गोड़ी के असवार के रूप में उनकी छवि भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है। तेजाजी की कृपा से काला-बाला जैसे संकटों का नाश होता है, और उनकी महिमा कलयुग में भी उतनी ही प्रबल है। उनका आशीर्वाद भक्तों को हर दिशा से पुकारता है, जहां उनकी पवित्र छाया में नर-नारी सुख और शांति प्राप्त करते हैं। तेजाजी का मुखड़ा उगाणी दिशा में विराजमान है, और दूर-दूर से आने वाले यात्री उनके जयकारों से आकाश को गूंजायमान करते हैं, यह विश्वास रखते हुए कि तेजाजी हर विपदा को मिटा देते हैं।

तेजाजी का दरबार वह पावन स्थल है, जहां रामदेवजी, बजरंग बली, और अन्य लोकदेवताओं की उपस्थिति उनकी महिमा को और बढ़ाती है। हरीयल नीम की छाया में भक्तों को शांति मिलती है, और माता झातला के लंबे बाण की तरह तेजाजी की शक्ति हर बाधा को चीर देती है। भेरु के चरणों में गूंजने वाली खिलखिलाहट और लालजी द्वारा चंवर ढुलाने की भक्ति तेजाजी के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाती है। मगनीराम जैसे भक्त अपनी लाज की रक्षा के लिए तेजाजी की शरण में आते हैं, और उनकी कृपा से हर मनोकामना पूर्ण होती है। यह तेजाजी की वह उपकारी शक्ति है, जो भक्तों को सदा अपने प्रेम और आशीर्वाद से बांधे रखती है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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