जब आशीर्वाद हो माते का तब हर विपदा
जब आशीर्वाद हो माते का तब हर विपदा
(मुखड़ा)
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।।
(अंतरा)
तुम कुछ चाहो ना चाहो,
ध्यान तुम्हारा रखती है।
ज़रूरत पड़ने से पहले ही,
माँ प्रबंध कर देती है।
जीवन में तुम्हारे सारी खुशियाँ,
खुद ही खिंची चली आती है।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।।
(अंतरा)
जिनके एक इशारे पर,
रचनाकार भी आते हैं।
तीन लोक, चौदह भुवनों में,
सब ही शीश झुकाते हैं।
वो मात भवानी संकट हरने,
एक पुकार पे आती है।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।।
(अंतरा)
मैं प्राणी इस माया का,
हिस्सा बनकर जन्मा हूँ।
मिलने की तुमसे आस लिए,
मंदिर मंदिर फिरता हूँ।
पर डरता नहीं मैं तेरी कृपा से,
रात भी दिन बन जाती है।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।।
(पुनरावृति)
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।।
(अंतरा)
तुम कुछ चाहो ना चाहो,
ध्यान तुम्हारा रखती है।
ज़रूरत पड़ने से पहले ही,
माँ प्रबंध कर देती है।
जीवन में तुम्हारे सारी खुशियाँ,
खुद ही खिंची चली आती है।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।।
(अंतरा)
जिनके एक इशारे पर,
रचनाकार भी आते हैं।
तीन लोक, चौदह भुवनों में,
सब ही शीश झुकाते हैं।
वो मात भवानी संकट हरने,
एक पुकार पे आती है।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।।
(अंतरा)
मैं प्राणी इस माया का,
हिस्सा बनकर जन्मा हूँ।
मिलने की तुमसे आस लिए,
मंदिर मंदिर फिरता हूँ।
पर डरता नहीं मैं तेरी कृपा से,
रात भी दिन बन जाती है।
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।।
(पुनरावृति)
जब आशीर्वाद हो माते का,
तब हर विपदा मिट जाती है।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।
जय हो माँ महारानी,
जय हो माँ त्र्यंबके।।
जब आशीर्वाद हो माते का, भजन गीत Jab ashirwad ho mate ka Bhajan geet
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माता त्र्यंबके की कृपा ऐसी असीम शक्ति है, जो भक्त के जीवन से हर संकट को मिटा देती है और उसके हृदय को सुख-शांति से परिपूर्ण करती है। उनकी ममता इतनी गहन है कि भक्त की हर आवश्यकता को वे पहले ही जान लेती हैं और उसका प्रबंध कर देती हैं। माता का आशीर्वाद वह प्रकाश है, जो जीवन की हर अंधेरी राह को रोशन करता है, और उनकी एक पुकार पर ही सारी सृष्टि का रचनाकार भी उनके समक्ष नतमस्तक हो जाता है। भक्त के लिए माता की कृपा वह ढाल है, जो उसे हर विपदा से बचाती है और जीवन में खुशियों को स्वयं आकर्षित करती है।
यह संसार माया का जाल है, जिसमें जीव भटकता है, पर माता की भक्ति और उनके दर्शन की आस उसे सही मार्ग दिखाती है। जो भक्त सच्चे मन से माता के चरणों में शरण लेता है, उसे किसी भी भय का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि माता की कृपा से रात भी दिन के समान उज्ज्वल हो जाती है। तीनों लोकों और चौदह भुवनों की स्वामिनी माता भवानी एक पुकार पर ही अपने भक्तों के संकट हरने दौड़ आती हैं। उनका आशीर्वाद वह अमृत है, जो जीवन को सार्थक बनाता है और भक्त को हर कठिनाई से पार ले जाता है।
यह संसार माया का जाल है, जिसमें जीव भटकता है, पर माता की भक्ति और उनके दर्शन की आस उसे सही मार्ग दिखाती है। जो भक्त सच्चे मन से माता के चरणों में शरण लेता है, उसे किसी भी भय का सामना नहीं करना पड़ता, क्योंकि माता की कृपा से रात भी दिन के समान उज्ज्वल हो जाती है। तीनों लोकों और चौदह भुवनों की स्वामिनी माता भवानी एक पुकार पर ही अपने भक्तों के संकट हरने दौड़ आती हैं। उनका आशीर्वाद वह अमृत है, जो जीवन को सार्थक बनाता है और भक्त को हर कठिनाई से पार ले जाता है।
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Author - Saroj Jangir
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