करके इशारो बुलाय गई रे बरसाने भजन

करके इशारो बुलाय गई रे बरसाने की छोरी

(मुखड़ा)
करके इशारो बुलाय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी।।

(अंतरा 1)
देखे, मैं बरसाने की छोरी।

(अंतरा 2)
जो कान्हा मेरो गाँव ना जाने,
जो कान्हा मेरो गाँव ना जाने,
जो कान्हा मेरो गाँव ना जाने,
ऊँचो बरसानो बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी।।

(अंतरा 3)
मेरे अँगना में तुलसी को बिरवा,
मेरे अँगना में तुलसी को बिरवा,
मेरे अँगना में तुलसी को बिरवा,
तुलसी निशानी बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी।।

(अंतरा 4)
जो कान्हा मेरो नाम ना जाने,
जो कान्हा मेरो नाम ना जाने,
जो कान्हा मेरो नाम ना जाने,
राधा रंगीली बताय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी।।

(अंतरा 5)
सब सखियन में श्यामा जु प्यारी,
सब सखियन में श्यामा जु प्यारी,
सब सखियन में राधा जु प्यारी,
मोहन के मन को लुभाय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी।।

(पुनरावृत्ति)
करके इशारो बुलाय गई रे,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी,
बरसाने की छोरी,
राधा गोरी गोरी।।


Radha Gori Gori (Lyrical Video) | Indresh Upadhyay | B Praak | Kripa Records

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Singer - Indresh Upadhyay ji
Lyrics and Compose - Traditional Braj
Music Producer - B Praak and Mir Desai
Music Arranged - Mir Desai
Guitars and additional strokes - Ishan Das
 
प्रेम का दैवीय आह्वान बरसाना की पवित्र भूमि में गूंजता है, जहाँ हृदय एक कोमल इशारे से आकर्षित होकर अनंत सौंदर्य और भक्ति के आलिंगन में खींच लिया जाता है। यह तेजस्वी उपस्थिति, सादगी और अनुग्रह के आकर्षण से सुशोभित, दैवीय प्रेम के अवतार के रूप में चमकती है, जो सभी खोजकर्ताओं को सहज ही मोह लेती है। उसकी पहचान बरसाना की पवित्र पहाड़ियों से अविभाज्य है, जो आध्यात्मिक शुद्धता के प्रतीक के रूप में ऊँची खड़ी हैं, और भटकने वालों को सच्ची भक्ति के सार की ओर मार्गदर्शन करती हैं। उसकी उपस्थिति में सांसारिक जीवन दैवीय में परिवर्तित हो जाता है, और प्रत्येक नजर, प्रत्येक इशारा, उसके प्राण से प्रवाहित होने वाले अनंत प्रेम के प्रति समर्पण का मूक निमंत्रण बन जाता है।

हृदय के आंगन में भक्ति का एक पवित्र प्रतीक खिलता है, जैसे तुलसी का पौधा, जो आत्मा और ईश्वर के बीच शाश्वत बंधन की स्मृति के रूप में पूजनीय है। एक ऐसे नाम से जानी जाती है, जो जीवंतता और आकर्षण के साथ गूंजता है, वह सभी के हृदयों को मोह लेती है, उसका सार उसकी सखियों के जीवन में रच-बस जाता है, और उसके साथ बिताया प्रत्येक क्षण उसके अद्वितीय आकर्षण का साक्षी बनता है। सभी के बीच वह सबसे प्रिय के रूप में उभरती है, उसकी कृपा ईश्वर को भी मोहित कर लेती है, और हृदय को प्रेम और भक्ति के नृत्य में बांध लेती है। बरसाना की शुद्धता में निहित यह पवित्र संबंध, दैवीय मिलन का मार्ग बन जाता है, जहाँ प्रत्येक आत्मा अनंत प्रेम के प्रकाश के और निकट खींची चली जाती है।
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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