धन धन भोलेनाथ बांट दियो तीन लोक भजन

धन धन भोलेनाथ बांट दियो तीन लोक

प्रथम वेद ब्रह्मा को दे दिया, भये वेद के अधिकारी ।
विष्णु को दिया चक्र सुदर्शन, लक्ष्मी सी सुंदर नारी ।

आप भजन में मस्त रहे… मोरे बाबा 
भंग पियो नीत खप्पर में ।
एसो दीनदयाल मोरे बाबा भर्यो ख़ज़ानों पलभर में ॥

घन घन भोलेनाथ बाँट दिये, तीन लोक इक पलभर में ।
एसो दीनदयाल मोरे बाबा, भरे ख़ज़ाना पलभर में ॥

अमृत तो देवों को दे दिया,आपने हलाहल पान किया,
ब्रह्म ज्ञान दे दिया उसी को,जिसने आपका ध्यान करा । 🔱

अपने पास एक वस्त्र ना रखके,मस्त रहे बाघम्बर में 
ऐसो दीन दयल मोरे बाबा,भयों खजानो पल भर में 🙇‍♀️

धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये,तीन लोक इक पल भर में ।
ऐसो दीनदयाल मोरे दाता,भरे खजाना पल भर में ॥🛕

वीणा तो नारद को देदी है,हरी भजन का राग दीया 🙇‍♀️
ब्राह्मण को दिया कर्म काण्ड,और सन्यासी को त्याग दिये 🔱

अपने पास में कुछ नहीं रखते (मोरे बाबा) मस्त रहें अपने तप मे 🙇‍♀️
ऐसो दिनदयल मोरे बाबा,भयों खजानो पल भर में ♥️

धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये,तीन लोक इक पल भर में 
ऐसो दीनदयल मोरे दाता,भयों खजाना पल भर में 🔱

लंका गढ़ रावण को दे दीया बीस भुजा दस शिष दिये
रामचंद्रजी को धनुष बाण तुमही ने तो जगदीश दिये 🙇‍♀️

जिसने जो चाहा उसने ओ पाया (मोरे बाबा)
महादेव तुम्हरे वर मे 🙇‍♀️
ऐसो दिनदयल मोरे बाबा,भयों खजानो पल भर में ♥️

धन धन भोलेनाथ बॉंट दिये,तीन लोक इक पल भर में 
ऐसो दीनदयल मोरे दाता,भरें खजाना पल भर में 🔱

धन धन भोलेनाथ बांट दियो,
तीन लोक एक पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में।।

प्रथम वेद ब्रह्मा को दे दिया,
बने वेद के अधिकारी,
विष्णु को दिया चक्र सुदर्शन,
लक्ष्मी सी सुंदर नारी,
इंद्र को दिया कामधेनु और,
ऐरावत सा बलकारी,
कुबेर को सारी वसुधा का,
बना दिया यूं अधिकारी,
आप भजन में मस्त रहो और,
भंग पियो नित खप्पर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में,
धन धन भोलेनाथ बांट दियो,
तीन लोक एक पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में।।

अमृत तो देवों को दे दिया,
आप हलाहल पान किया,
ब्रह्मज्ञान दे दिया उसी को,
जिसने आपका ध्यान किया,
भागीरथ को गंगा दे दी,
कलयुग में स्नान किया,
बड़े-बड़े पापियों को तारा,
पल भर में कल्याण किया,
अपने पास में वस्त्र न रखते,
मस्त रहे बाघम्बर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में,
धन धन भोलेनाथ बांट दियो,
तीन लोक एक पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में।।

वीणा तो नारद को दे दी,
हरि भजन का राग दिया,
ब्राह्मण को दिया कर्मकांड और,
सन्यासी को त्याग दिया,
और रावण को लंका दे दी,
बिस भुजा दस शीष दिए,
रामचंद्र को धनुष बाण,
तुम्हीं ने तो जगदीश दिए,
अपने पास नहीं कुछ रखते,
मस्त रहे अपने घर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में,
धन धन भोलेनाथ बांट दियो,
तीन लोक एक पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में।।

धन धन भोलेनाथ बांट दियो,
तीन लोक एक पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में,
ऐसे दीन दयालु मोरे बाबा,
भरे खजाना पल भर में।।


धन धन भोलेनाथ बाँट दियो | Upasana Mehta | अमृत तो देवों को दे दिया | Shiv Bhajan 2025 |

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परम कृपालु और दयालु स्वरूप की महिमा अनंत है, जो अपने भक्तों पर अपार प्रेम और करुणा बरसाते हैं। उनकी दया का कोई ठिकाना नहीं, जो एक पल में तीनों लोकों का वैभव बांट देते हैं। यह दया ऐसी है कि जो भी उनके शरण में आता है, उसे वह अपने खजाने से नवाजते हैं। चाहे वह ब्रह्मा को वेदों का ज्ञान हो, विष्णु को सुदर्शन चक्र और लक्ष्मी जैसी समृद्धि हो, या फिर इंद्र को ऐरावत और कामधेनु जैसे उपहार हों, उनकी कृपा से सभी कुछ संभव हो जाता है। उनकी दया का यह प्रवाह इतना प्रबल है कि वह कुबेर को धरती का धन-वैभव सौंपकर भी स्वयं भजन और भक्ति में मस्त रहते हैं। उनकी यह उदारता और निस्वार्थ भावना सिखाती है कि सच्ची समृद्धि दूसरों को बांटने और उनके कल्याण में ही निहित है।
 
Singer : Upasana Mehta
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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