बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे भजन

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे भजन

बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,
पौणाहारी दा दरबार भगतो खिली होई गुलजार,
संगत बोले जय जय कार जी योगी दर रंग बरसे,
बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

हर पासे होइया रुषनाइयाँ लगाया भारी मेला,
विच सरावा चौंकियाँ लगन होई शाम दी वेला,
सारी रात जैकारे लगन चिमटा आते ढ़ोलका वजन,
भेटा गा कर न सेवक न रजन,योगी दर रंग बरसे,
बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

सजिया भी दुकान भगतो आउंदे बड़े नजारे,
रंग बिरंगियां लाईटा जगदियाँ पेंदे ने चमकारे,
हटियाँ वाले होका लांदे देशी घी दे रोट बनाउँदै,
लेजो संगता ताई सुनादे,योगी दर रंग बरसे,
बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,

बाबे दे दरबार दी महिमा सुन तिरलोचन आया,
पटी वाले गोल्डी ताहि अपने नाल ले आया,
बाबे दे दरबार दी महिमा सुन तिरलोचन आया,
जे भी दी ग्रुप सारा शिमले तो आया,
कहन्दे धन धन पौणाहारी तेरी सूंदर गुफा प्यारी,
बाबा पूजे दुनिया सारी,योगी दर रंग बरसे,
बल्ले बल्ले जी जोगी दर रंग बरसे,



Jogi Dar Rang Barse. Jatinder Goldy. Rk production co.

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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