ऊँचो गोवर्धन को पर्वत जापे मोर बोले
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत जापे मोर बोले
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,जा पे मोर बोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले,
बच के रहियो राधा गौरी,
माखन चोर डोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले।
वहाँ गाय चरातो होगो,
नंदलाला,
जाके संग में होंगे,
सब ग्वाला,
कान्हा माखन को खवैया,
मीठो मीठो बोले,
बच के रहियो राधा गौरी,
माखन चोर डोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले।
मटकी तू दुबकाय ले,
चुनरिया से,
बच के चल श्याम,
सांवरिया ते,
बाजे पायल की झंकार,
चले हौले हौले,
बच के रहियो राधा गौरी,
माखन चोर डोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले।
तू सुन ले सखी,
राधा प्यारी,
दही लूट के खाय जाय,
बनवारी,
मेरी मान कही,
घुंघट मत खोले,
मटकी दुबका लियो राधा,
माखन चौर डोले,
बच के रहियो राधा गौरी,
माखन चोर डोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले।
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले,
बच के रहियो राधा गौरी,
माखन चोर डोले,
ऊँचो गोवर्धन को पर्वत,
जा पे मोर बोले।
भजन श्रेणी : कृष्ण भजन (Krishna Bhajan)
Uche Gobardhan Ke Parvat | उचे गोवर्धन के पर्वत | Krishna Bhajan
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