पड़ जाने दे फेरे बन्ना सबको नाच नचा दुंगी
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
मैं तो नहाऊं ताते पानी
तुमको नल मैं चलाय दुंगी
सास को दुंगी ठंडा पानी
उसमें बरफ गिराय दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
मैं तो खाऊं पूड़ी कचौड़ी
तुमको रोटी बनाय दुंगी
सास को दुंगी बासी रोटी
ऊपर चटनी लगाय दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
मैं तो घूमूं मोटर गाड़ी
तुमको बाइक दिलाय दुंगी
सास को बिठाऊँ टूटी साइकिल
पीछे धक्का लगाय दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
सबको नाच नचा दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
मैं तो नहाऊं ताते पानी
तुमको नल मैं चलाय दुंगी
सास को दुंगी ठंडा पानी
उसमें बरफ गिराय दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
मैं तो खाऊं पूड़ी कचौड़ी
तुमको रोटी बनाय दुंगी
सास को दुंगी बासी रोटी
ऊपर चटनी लगाय दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
मैं तो घूमूं मोटर गाड़ी
तुमको बाइक दिलाय दुंगी
सास को बिठाऊँ टूटी साइकिल
पीछे धक्का लगाय दुंगी,
पड़ जाने दे फेरे बन्ना,
सबको नाच नचा दुंगी,
घर आने दे बन्ना सबको,
नानी याद करा दुंगी।
लोक गीत श्रेणी : लोकगीत Lokgeet/Folk Song
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धमाकेदार बन्नी।बन्ना गीत । सबको नाच नचाय दुंगी Song By Braj Geet Sabko Nachay Dungi Banna Banni Geet
जहाँ दुल्हन (बन्नी) अपने होने वाले पति (बन्ना) के सामने यह कहकर हंसी-मज़ाक कर रही है कि वह ससुराल में जाकर सबको अपनी धुन पर नचाएगी। यह असल में किसी विद्रोह का भाव नहीं, बल्कि विवाह के नए रिश्ते में हास्य और अधिकार स्थापित करने की एक चंचल कोशिश है। यह बताता है कि दुल्हन, जो अब तक अपने मायके में लाड़-प्यार से पली है, वह नए घर में अपने वजूद और शर्तों को हल्के-फुल्के ढंग से स्थापित करना चाहती है। "नानी याद करा दूंगी" कहना केवल एक मज़ाक है, जो यह दर्शाता है कि वह ससुराल के माहौल को खुशनुमा और अपनी मर्ज़ी से चलाने का सपना देख रही है।
