आयुर्द्रोणसुते श्रीयं, दशरथे शत्रुक्षयं राघवे। अर्थ: आप द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा की तरह लंबे समय तक जीवित रहें। राजा दशरथ के समान आपकी प्रतिष्ठा बढ़े। आप भगवान राम के भांति अपने शत्रुओं का विनाश करने में सक्षम हों।
ऐश्वर्यं नहुषे गतिश्च पवने, मानञ्च दुर्योधने। अर्थ: आपका भौतिक कल्याण, राजा नहुष के भांति हो, आपकी गति वायु के समान हो, राजकुमार दुर्योधन की तरह, लोग आपका सम्मान करें।
शौर्य शान्तनवे बलं, हलधरे सत्यञ्च कुन्तीसुते। अर्थ: शांतनु के पुत्र के समान शौर्य हो, आप भगवान कृष्ण के, बड़े भाई बलराम के समान, बलवान बनें।
आप कुंती के पुत्र युधिष्ठिर के समान सच्चे बनें।
विज्ञान बिदुरे भवति, भवताम किर्तिश्च नारायण। अर्थ: आप विदुर के समान बुद्धिमान बनें, भगवान नारायणम की, तरह आपकी महिमा बढ़ती रहे।
लक्ष्मीस्ते पंकजाक्षी, निवसतु भवने, भारती कण्ठदेशे, वद्र्धन्तां बन्धुवर्गाः सकलरिपुगणाः यान्तु पातालमूले। अर्थ: आपके घर में कमल के समान नेत्रों वाली लक्ष्मी माँ विराजमान हों, माता सरस्वती कण्ठ में बिराजे, आप के बंधू वर्ग बढ़े, सभी शत्रु पाताल में जायें।
हायनानां शतैश्च। अर्थ: आपकी ख्याति पूरे देश में फैले, आप सौ वर्ष, पुत्र पौत्र सहित, सभी सुखों को प्राप्त करें।
आयुर्वृद्धिर्यशोवृद्धिर्वृद्धि, प्रज्ञासुखश्रियाम्, धर्मसन्तानयोर्वृद्धिः, सन्तु ते सप्तवृद्धयः। अर्थ: आप दीर्घायु बने, यश बढे, ज्ञान, सुख और धन में वृद्धि हो। धर्म और बच्चे बढ़े, आप में ये सात चीजें बढ़ें।
जयन्ती मंगला काली, भद्रकाली कपालिनी, दुर्गा क्षमा शिवा धात्री, स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते। अर्थ: जयन्ती, मंगला, काली, भद्रकाली, कपालिनी, दुर्गा, क्षमा, शिवा, धात्री, स्वाहा, स्वधा आदि नाम वाली हे देवी आपको मेरा नमस्कार है।
जय त्वं देवि चामुण्डे, जय भूतापहारिणि,
जय सर्वगते देवि, कालरात्रि नमोऽस्तु ते। अर्थ: देवी चामुण्डे तुम्हारी जय हो, सम्पूर्ण प्राणियों की पीड़ा हरने वाली देवी तुम्हारी जय हो, सब में व्याप्त रहने वाली देवी तुम्हारी जय हो कालरात्रि तुम्हें नमस्कार हो।
ब्रह्मा करोतु दीर्घायुर्विष्णु:, करोतु सम्पद:, हरो हरतु पापानि, गात्रं रक्षतु चण्डिका। अर्थ: ब्रह्मा आप को दीर्घायु करे, विष्णु आप को सम्पदा दे, महादेव आप के सभी पापों का नाश करें, माता चंडिका आप के शरीर की रक्षा करे।
निवसतु तव गेहे, निश्चला सिन्धुपुत्री, प्रविशतु भुजदण्डे, कालिका शत्रुहन्त्री, तव वदनसरोजे, भारती भातु नित्यं, न चलतु तव चित्तं, पादपद्मान्मुरारेः। अर्थ: आपके घर में अचल लक्ष्मी का वास हो, शत्रु का नाश करने वाली, कालिका आप के घर में बसे, सरस्वती हमेशा आपके चेहरे पर चमकती रहे। आपका मन भगवान विष्णु के चरण कमलों में लगा रहे।
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