सर पे हिमालय का छत्र है देशभक्ति सोंग

सर पे हिमालय का छत्र है देशभक्ति सोंग

 
सर पे हिमालय का छत्र है देशभक्ति सोंग

जय भारती,
वन्दे भारती....
सर पे हिमालय का छत्र है,
चरणों में नदियाँ एकत्र हैं,
हाथों में वेदों के पत्र हैं,
देश नहीं ऐसा अन्यत्र है
जय भारती वन्दे भारती
जय भारती, वन्दे भारती............।

धुंए से पावन ये व्योम है,
घर घर में होता जहाँ होम है,
पुलकित हमारे रोम रोम है,
आदि अनादि शब्द ॐ है
जय भारती वन्दे भारती
जय भारती, वन्दे भारती............।

जिस भूमि पे जन्म लिया राम ने,
गीता सुनायी जहाँ श्याम ने ,
पावन बनाया चारो धाम ने,
स्वर्ग भी ना आये जिसके सामने
जय भारती  वन्दे भारती
जय भारती, वन्दे भारती............। 

Jai Bharati Vande Bharati Lata Mangeshkar Patriotic Song

भारत माता की श्रेष्ठता, सांस्कृतिक परंपरा और अनूठे आध्यात्मिक वैभव का भाव-स्त्रोत यहाँ हर छवि में उजागर है। हिमालय की अडिग छाया, चरणों में बहती पतित पावनी नदियाँ और हाथों में सनातन ज्ञान के वेद—इन प्रतीकों के माध्यम से गीत भारतवर्ष को सृष्टि का सबसे पावन, अनुपम और जीवनदायी क्षेत्र मानता है। यहाँ हर घर में यज्ञ-होम और शुद्ध वायु की अनुभूति होती है; आकाश, जीव, वातावरण पवित्रता और ओंकार से गुँजायमान है।

यह पुण्यभूमि वह है जहाँ भगवान राम का जन्म हुआ, श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया, चारों धामों ने उसे महत्ता दी—जिसके आगे स्वर्ग भी तुच्छ प्रतीत होता है। गीत में जहां-जहां यह भूमि छूती है, वहाँ-वहाँ आस्था, पौरुष, आध्यात्मिक चेतना और भारतीय संस्कृति का दिव्य आलोक जगमगाता है—यही सच्चा वंदन, गर्व और देश के प्रति भाव है.

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