फागणियो आयो चालो चालो रे खाटू चाला रे भजन

फागणियो आयो चालो चालो रे खाटू चाला रे भजन


फागणियो आयो,
चालो चालो रे खाटू चाला रे,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे।

फागणिया में बाबो सबने,
झाली देर बुलावे है,
सगला प्रेमी खाटू जावे,
बाबा ने रंग लगावे है,
फागण को मेला,
रंग रंगीलो बाबा आयो है,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे।

रींगस सु निशान आवे है,
रंग गुलाल उडे है,
प्रेमी पैदल पैदल आवे,
जय जयकार बोले है,
बाबो भक्तां के सांगे सांगे ही,
देखो चाले है,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे।

रंग रंगीली खाटू नगरिया,
बाबा खूब सजी है,
सगला प्रेमी नाचे गावे,
जयकारा बोले है,
भक्ता भी बाबा,
झूम झूम के भजन सुनावे है,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे।

फागणियो आयो,
चालो चालो रे खाटू चाला रे,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे,
मंदिर में बैठ्यो बाबो,
बुलावे रे।



Faganiyo Aayo || Riya Barun Biswas || Latest #fagunspecial Shyam Baba Bhajan 2026

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Title :- Faganiyo Aayo 
Singer :- Riya Barun Biswas 
Music :- Lakhdatar (9867050005) 
Video:- Madhav creations
Producers:- Rudra Gupta, Madhav Gupta
Label:- Lakhdatar Music&films
 
फाल्गुन के पावन महीने में खाटूधाम की ओर बुलावे की मधुर पुकार उठती है, मानो स्वयं श्याम बाबा मंदिर में विराजकर अपने प्रेमियों को बुला रहे हों। रंग और गुलाल से सजी राहों पर दूर‑दूर से आते निशान, पैदल यात्राएँ, जयकारों की गूंज और नाचते‑गाते रमेले साधकों की टोलियाँ पूरे वातावरण को आनन्दमय बना देती हैं। नगरी रंग‑रंगीली हो उठती है, मंदिर सजता है, फागण का मेला लगते ही भजन‑कीर्तन में झूमते हुए हृदय, बाबा को रंग लगाने की लालसा में भीग जाते हैं और हर किसी को लगता है कि उसे व्यक्तिगत रूप से पुकारा जा रहा है।

खाटू वाले श्याम धनी फाल्गुन मेले में विशेष रूप से कृपा बरसाने वाले दयालु स्वामी के रूप में अनुभव होते हैं। उनका दरबार केवल मनोकामनाओं के लिए नहीं, प्रेम, समर्पण और आनंद का अनोखा संगम है, जहाँ पहुँचकर थका‑हारा मन हल्का हो जाता है। रथ‑यात्रा, सजावट, झांकियाँ और निरंतर गूंजता श्याम नाम साधकों को यह अनुभूति कराता है कि वे किसी सामान्य मेले में नहीं, अपने स्वामी के स्वयं रचे प्रेमोत्सव में शामिल हैं। जो एक बार इस बुलावे पर खाटू पहुँचता है, उसके लिए फागण का अर्थ केवल त्यौहार नहीं, श्याम के साथ अपने रिश्ते को फिर से जीने और गहरा करने का अवसर बन जाता है। 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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