शिव गौरा साथ साथ भूत पलित आस पास भजन

शिव गौरा साथ साथ भूत पलित आस पास भजन

शिव गौरा साथ साथ,
भूत प्रेत आस पास,
भस्मी अघोरा उड़ावे रे,
देखो शिवजी होली मनावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

पेलो रंग श्री गणेश जी खेले,
मात पिता का चरण सराहे,
दिव्य जगत की होली निराली,
नर नारी सबको मन मोहे,
वी तो केसर सूंड से उड़ावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

दूसरो रंग मां गौरा खेले,
लालन पे ममता उड़ेले,
नव शक्ति का नौ रंग जग में,
मां की कृपा बनी ने फैले,
वा तो लाल गुलाल उड़ावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

तीसरो रंग नंदीगण खेले,
शिव परिवार का पांव पखारे,
जटा से निकली गंगाजी को,
जल पावन ले सींग से बिखेरे,
वी तो चमक अबीर उड़ावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

चौथो रंग आकाश से टपके,
ब्रह्मा विष्णु लीला दरसे,
नारद ऋषि मुनि योगी ध्यानी,
तप साधन अपना सब खर्चे,
वी तो आनंद रस बरसावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

पांचवो रंग है दीन दयाल को,
साधु संतों का प्रतिपाल को,
श्वेतांबर पीतांबर धारी श्री,
भूत भावन मुंडमाल को,
वी तो भंग को रंग जमावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

विप्रवर फागण को है केणो,
मन उमंग बसाए ने रखणो,
बड़ी मुश्किल से पायो हमने,
रंग रंगीलो जीवन अपणो,
अरे दूर उदासी भगाओ रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।

शिव गौरा साथ साथ,
भूत प्रेत आस पास,
भस्मी अघोरा उड़ावे रे,
देखो शिवजी होली मनावे रे,
म्हारा शिवजी होली मनावे रे।।



उज्जैन में देखो शिवजी होली मानावे रे,शिवा गोरा साथ साथ,भूत पलीत आसपास,भस्मी अघोरा उड़ावे रे, महाकाल

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शिवजी और गौरा माँ साथ-साथ होली खेलें तो भूत-पिशाच भी आसपास नाच उठते हैं। भस्म रमाए अघोर रूप में रंग उड़ाते भोले बाबा जी का उत्सव निराला है। गणेश जी केसर की सूंड से रंग छिड़कें, मात-पिता के चरणों में सर झुकाएँ। गौरा माँ लाल गुलाल उड़ाएँ, नव शक्तियों के नौ रंग बिखेर दें। नंदीगण चमक-अबीर बरसाएँ, जटा से गंगा जी का पावन जल छिड़कें। ब्रह्मा जी-विष्णु जी आकाश से रंग टपकाएँ, नारद ऋषि तप खर्च करें। ये दिव्य होली मन मोह लेती है, उदासी को दूर भगाती है। जैसे वो गाँव का महात्मा, भंग पीकर सबको गले लगाता। जीवन रंगीन हो जाता है प्रभु की लीला से।

दीन दयाल शिवजी श्वेताम्बर-पीतांबर धारी, भूत भवन मुंडमाल वाले भंग का रंग जमाएँ। साधु-संतों का प्रतिपाल बन रंग बिखेरें। विप्रवर फाग गाएँ, मन उमंग से भर जाए। बड़ी मुश्किल से मिला ये रंगीला जीवन, अब दूर भगाओ उदासी। शिव परिवार की होली में सबका वास है। आप सभी पर इश्वर का आशीर्वाद बना रहे। जय श्री शिव गौरा जी की।
 
शिव गोरा साथ-साथ भूत प्रेत आस पास, भस्मी अघोरा उड़ावे रे देखो शिवजी होली मानावे रे देखो शिवजी होली मनावे रे महाकाल में होली मनावे रे....
कलाकार 
1. डॉ. सतीश गोथरवाल (निर्देशन)
2. दक्ष गोथरवाल (मुख्य गायन)
3. आकृति जोशी (मुख्य गायन)
4. हिराश्मी चौहान (सह गायन)
5. माहीप्रिया (सह गायन)
6. मंजू त्रिपाठी (सह गायन)
7. धनिष्ठा चौहान गायन
8. धनवंती गोथरवाल (संचालन)
9. दिव्यांश बुन्देल (सह वाद्य)
10. विजय गांगोलिया (ढ़ोलक)
11. केशव सोलंकी (तबला)
12. अमरीश पाठलिया (की बोर्ड)
लेखक - पंडित संजय शर्मा विप्रवर 
यह गीत महाकाल बाबा को समर्पित है। 'माच शैली' पद्मश्री उस्ताद कालूराम माच अखाड़ा के परंपरा के अनुसार उनके द्वारा रचित धुन पर आधारित यह गीत अनादि पर्व (विक्रम महोत्सव 2026) त्रिवेणी संग्रहालय में 28 फरवरी 2026 को बाबा के चरणों में स्वरमई सुमन अर्पित किया गया।
जय श्री महाकाल 
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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