देखूं जहाँ जहाँ मैं इक तू ही तू है माँ भजन
देखूं जहाँ जहाँ मैं इक तू ही तू है माँ भजन
देखूं जहाँ जहाँ मैं,इक तेरा ध्यान आये,
जाऊं जहाँ जहाँ मैं,
इक तू ही नज़र आये,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ,
हर शै में तू है समाई,
ये सृष्टि तुमने रचाई,
क्या करूँ तुम्हारी बढ़ाई,
सब पर कृपा बरसाई,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ।
रिपुदल मर्दिनी,
पाप संहर्णि,
देव करें तेरी पूजा,
देव करें तेरी पूजा,
देव करें तेरी पूजा,
हर संकट को हरनेवाली,
तुझसा नहीं की कोई दूजा,
तुझसा नहीं कोई दूजा,
तुझसा नहीं कोई दूजा,
सदा सहाई और ना कोई,
सदा सहाई और ना कोई,
हर पल, हर क्षण क्षण में,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ।
तू जिसको भी चाहे,
वो भवसागर से तर जाये,
वो भवसागर से तर जाये,
वो भवसागर से तर जाये,
ना कोई उसको चिन्ता,
जो तेरी शरण में आये,
जो तेरी शरण में आये,
जो तेरी शरण में आये,
वो तर जाये तुम्हें बसा ले,
वो तर जाये तुम्हें बसा ले,
जो अपने तन मन में,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ।
तुझको कहां कहां ढूँढे माँ,
भक्त तेरे इस जग में,
माँ भक्त तेरे इस जग में,
माँ भक्त तेरे इस जग में,
तू जिसको चाहे वो देखे,
तुझको अपने मन में,
वो देखे तुझको अपने मन में,
देखे तुझको अपने मन में,
तुम्हीं समाई हो नभ में,
माँ तुम्हीं समाई हो नभ में,
और धरती के कण कण में,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ,
तू ही तू है तू ही तू है,
तू ही तू है माँ।
Maa Vaishno Bhajan - Tu hi tu hai maa
देखो जहाँ भी नज़र जाए, हर तरफ़ बस माँ का ही रूप दिखता है। पेड़ों की पत्तियों में, हवा की सरसराहट में, आकाश की नीली चादर में, धरती के हर कण में – सबमें वो समाई हुई हैं। जैसे कोई माँ अपने बच्चे को चारों ओर से घेर ले, वैसे ही ये सृष्टि उनकी रचन है, उनकी कृपा से चल रही है। रिपुदल मर्दिनी, पाप संहारिणी, देवता भी उनकी पूजा करते हैं, क्योंकि उन जैसी कोई दूसरी नहीं। हर संकट को हरने वाली, हर पल सहारा देने वाली – बस वो ही हैं, और कोई नहीं। दिल कहता है कि तुझसा कोई नहीं, तू ही तू है माँ, हर जगह बस तू ही तू।
जिसे माँ चाह लेती हैं, वो भवसागर से आसानी से पार हो जाता है। शरण में आने वाला कभी चिंता नहीं करता, क्योंकि माँ उसे अपने में बसा लेती हैं, तन-मन में बस जाती हैं। भक्त ढूँढते फिरते हैं इस जग में, लेकिन वो तो मन में ही मिल जाती हैं। नभ में, धरती में, हर कण में उनकी मौजूदगी है। जो उन्हें मन से पुकार ले, वो देख लेता है कि माँ हर जगह हैं, हर सांस में हैं। ये अहसास इतना गहरा है कि सारी दुनिया फीकी पड़ जाती है, बस माँ का नाम गूँजता रहता है, और जीवन भर उनका साथ महसूस होता है। जैसे माँ कह रही हों, "बेटा, मैं तो हमेशा तेरे साथ हूँ, बस देख ले।"
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