जय माता की बोल हीरा जनम है भजन

जय माता की बोल हीरा जनम है भजन

जय माता की जय माता की,
जय माता की बोल,
हीरा जनम है,
इसे माटी में ना रोल,
जय माता की बोल,
हीरा जनम है,
इसे माटी में ना रोल।

भोर उठ के पहले,
ले अम्बे का नाम,
दर्शन को जा फिर,
जगदम्बे के धाम,
पल पल से काम ले,
जीवन अनमोल,
हीरा जनम है,
इसे माटी में ना रोल।

दर्शन कर के फिर,
तू सुमिरन में डूब,
माया जगत है,
समझ ले यह खूब,
अंतर में लीन रह,
आँखे ना खोल,
हीरा जनम है,
इसे माटी में ना रोल।

माँ के प्रताप से,
है यह जीवन,
देर बिना लेले तू,
माँ की शरण,
माँ के पग थाम ले,
जग में ना डोल,
हीरा जनम है इसे,
माटी में ना रोल।


Jai Mata Ki Bol - Sherawali Maa Bhajan - Satram Chugh 

माता की जय‑जयकार उठते ही ऐसा लगता है जैसे जीवन खुद ही उजाले में खिंच रहा हो। इस जन्म को “हीरा जनम” कहा जाता है, इसलिए इसे मिट्टी में लोटने की जगह उसे सामने रखकर खुद से दूर नहीं करना चाहिए। भोर की पहली साँस से ही अम्बे का नाम लेना, फिर जगदम्बे के धाम में दर्शन के लिए चल पड़ना—ये सब इस बात की याद दिलाते हैं कि जीवन की हर घड़ी को पवित्र बनाने का रास्ता धीरे‑धीरे खुलता है।

दर्शन के बाद सुमिरन में डूब जाना यही सिखाता है कि बाहरी जगत माया है, उसमें इतना खोना नहीं जितना भीतर के रिश्ते गहरे करने हैं। माँ के प्रताप पर टिके जीवन को समझते हुए उनकी शरण जल्दी लेना, उनके पैर थाम लेने से जगत की डगमगाहट में भी खुद को दृढ़ रखना मुमकिन होता है। इस हीरा जन्म को मिट्टी में न घोलकर दिल में जगह देते रहो, तो जीवन से नाता इतना मजबूत हो जाता है कि दुनिया की हर तूफ़ानी लहर भी अंदर की शांति को नहीं बिगाड़ पाती। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री जगदम्बे माता जी की।

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