मैनु चरणी लगा लै हे दाती मातारानी भजन
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ अपना बना लै हे दाती,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
सानूँ अपना बना लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
तूँ मेहरा कीतियाँ कईयाँ ते,
कईयाँ दे काज संवारे माँ,
तूँ मेहरा कीतियाँ कईयाँ ते,
डुबदे बेड़े पार उतारे माँ,
तूँ सब दी रक्षा करनी ऐ,
कई दे बिगड़े काज संवारे माँ,
हो तूँ मेरी ऐ, मैं तेरा हाँ,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
जिस रंग विच ध्यान रंगेया सी,
माँ ओस्से रंग विच रंग मैनूँ,
तूँ आ के मैया जाई नाँ,
मैं रज–रज वेखा माँ तैनूँ,
मैं रज–रज वेखा माँ तैनूँ,
माँ–पुत दा कादा झगड़ा ऐ,
मैनूँ कोल बिठा के हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
एह अपनी–अपनी किस्मत ऐ,
कोई नेड़े ऐ, कोई दूर ऐ,
कई रोज द्वारे आउंदे ने,
कोई आन तों वी मजबूर ऐ,
मैया कोई आन तों वी मजबूर ऐ,
मैया, दर्शी नूँ ਕੁਝ नाहीं चाहिदा,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ अपना बना लै हे दाती,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
सानूँ अपना बना लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ अपना बना लै हे दाती,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
सानूँ अपना बना लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
तूँ मेहरा कीतियाँ कईयाँ ते,
कईयाँ दे काज संवारे माँ,
तूँ मेहरा कीतियाँ कईयाँ ते,
डुबदे बेड़े पार उतारे माँ,
तूँ सब दी रक्षा करनी ऐ,
कई दे बिगड़े काज संवारे माँ,
हो तूँ मेरी ऐ, मैं तेरा हाँ,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
जिस रंग विच ध्यान रंगेया सी,
माँ ओस्से रंग विच रंग मैनूँ,
तूँ आ के मैया जाई नाँ,
मैं रज–रज वेखा माँ तैनूँ,
मैं रज–रज वेखा माँ तैनूँ,
माँ–पुत दा कादा झगड़ा ऐ,
मैनूँ कोल बिठा के हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
एह अपनी–अपनी किस्मत ऐ,
कोई नेड़े ऐ, कोई दूर ऐ,
कई रोज द्वारे आउंदे ने,
कोई आन तों वी मजबूर ऐ,
मैया कोई आन तों वी मजबूर ऐ,
मैया, दर्शी नूँ ਕੁਝ नाहीं चाहिदा,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती,
मैनूँ गल नाल ला लै हे दाती,
मैनूँ अपना बना लै हे दाती,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
मैं तेरा दर छडना नहीं,
सानूँ अपना बना लै हे दाती,
मैनूँ चरणी लगा लै हे दाती।।
Bhajan || Mainu charni laga le hey daati By Maninder Ji || Maa Vaishno Devi Bhajan
Bhajan Name : Mainu charni laga le hey daati By Maninder Ji
Date : 13 December 2019 ( Morning Aarti bhajan )
जब कोई दर पर खड़ा होकर पुकारता है कि चरणों में लगा लो, गले लगा लो, तो माँ का दिल पिघल जाता है। ये पुकार इतनी सच्ची होती है कि बिगड़े काम संवर जाते हैं, डूबती नाव पार लग जाती है। हमें सिखाते हैं कि उनकी मेहर से हर रंग में रंग जाना, रज-रज में उन्हें देखना, बस यही जीवन की सच्ची खुशी है।
माँ-पिता का झगड़ा भी उनके पास बैठकर सुलझ जाता है, क्योंकि वो अपनों को कभी दूर न जाने दें। किस्मत हो या मजबूरी, जो द्वार पर आता है, उसे अपनी गोद में बिठा लेती हैं। ये रिश्ता ऐसा है जहाँ दर छोड़ना नामुमकिन लगता है, हर पल बस उसी की छाया में रहना चाहते हैं।
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