दिवानों की महफिल है दिवानें ही आते है भजन
दिवानों की महफिल है दिवानें ही आते है भजन
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं,
खाटू में ग्यारस की,
हाज़िरी लगाते हैं।।
घर से निकलते हैं,
साँवरे से मिलने को,
खाटू पहुँचते ही,
सीधे दर्शन को जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
भूख इन्हें भजनों की,
प्यास दर्शन की रहे,
श्याम की झलक पाकर,
भूख-प्यास मिट जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
श्रृंगार प्यारा है,
मन को लुभाता है,
बाँकी अदाओं पे,
दिल हार जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
बाबा से कहेंगे दिल की,
आते हैं यही सोचकर,
पग चौखट पे रखते ही,
सब कुछ भूल जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
श्याम के दिवानों का,
कहीं और ना ठिकाना है,
पूछो ज़रा इनसे,
सभी खाटू बताते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं,
खाटू में ग्यारस की,
हाज़िरी लगाते हैं।।
दिवाने ही आते हैं,
खाटू में ग्यारस की,
हाज़िरी लगाते हैं।।
घर से निकलते हैं,
साँवरे से मिलने को,
खाटू पहुँचते ही,
सीधे दर्शन को जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
भूख इन्हें भजनों की,
प्यास दर्शन की रहे,
श्याम की झलक पाकर,
भूख-प्यास मिट जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
श्रृंगार प्यारा है,
मन को लुभाता है,
बाँकी अदाओं पे,
दिल हार जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
बाबा से कहेंगे दिल की,
आते हैं यही सोचकर,
पग चौखट पे रखते ही,
सब कुछ भूल जाते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
श्याम के दिवानों का,
कहीं और ना ठिकाना है,
पूछो ज़रा इनसे,
सभी खाटू बताते हैं,
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं।।
दिवानों की महफिल है,
दिवाने ही आते हैं,
खाटू में ग्यारस की,
हाज़िरी लगाते हैं।।
Pyara sa shyam bhajan .... is bhajan ka writer Kailash sharma, singer Kailash sharma ..
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घट-घट में जो बेचैनी रहती है, वह खाटु की ठंडी मिट्टी पर आते ही सुकून में बदल जाती है; कदम चौखट पर रखते ही सारी दुनिया के गिल्ट-कष्ट पीछे छूट जाते हैं और केवल उस मणि-मुख में समर्पण का उछाल बचता है। भजन की तृष्णा और दर्शन की पियासी आँखें मिलन की वही प्यासी लहर बनती हैं जो हर खालीपन को भर देती है; नज़रों में श्याम की झलक आते ही सहजता से भूक-प्यास दोनों थम जाती हैं। श्रृंगार की कोमलता मन को मोह लेती है, पर असल मोहमाया तो उस अविरल श्रद्धा का है जो जहां भी बैठ जाए, वैसा ही अनुराग फूंक देती है। पगड़ी पर कदम रखकर, चौखट के पास खड़े होकर दिल की सारी व्याकुलता कुछ ही क्षणों में गायब हो जाती है—बाबा के दर्शन में ही सब कुछ समा जाता है। खाटु की ग्यारस में उमड़ी भीड़ नहीं, हर मुरिद की व्यक्तिगत पुकार सुनाई देती है; वहाँ हर दिवाना अपने ही प्यार का किस्सा लिए लौटता है, संतप्त पर तृप्त। जय श्री श्याम।
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Author - Saroj Jangir
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