माँये नी सांनु रख लो सेवादार भजन

माँये नी सांनु रख लो सेवादार मातारानी भजन

 
माँये नी सांनु रख लो सेवादार मातारानी भजन

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
शाम सवेरे ज्योत जगा के,
शाम सवेरे ज्योत जगा के,
तेरा करां दीदार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार।

चाँदी दे गड़ विच गंगा जल पानी,
गंगा जल पानी मां गंगा जल पानी,
भर भर लैयावां हर रोज भवानी,
रोज भवानी हर रोज भवानी,
इतर छिड़क के पुष्पा दे नाल,
इतर छिड़क के पुष्पा दे नाल,
तेरा करा श्रृंगार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार।

तेरेयां रगां दे विच मस्त रवां मैं,
मस्त रवां मै दाती मस्त रवां मैं,
हर वेले मैया तेरा नाम जपां मैं,
नाम जपां मै तेरा नाम जपां मैं,
भुल जावे मैनू दुनिया सारी,
भुल जावे मैनू दुनिया सारी,
ऐसा कर उपकार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार।

बचङे हां तेरे मैया गलतीयां करदे,
गलतीयां करदे मां गलतीयां करदे,
चरणां च डिगे सानु माफ मैया भरदे,
माफ मैया भरदे माफ मैया भरदे,
बचङे हां असीं तेरे दाती,
बचङे हां असीं तेरे दाती,
ऐनां तां देदे प्यार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार।

माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
शाम सवेरे ज्योत जगा के,
शाम सवेरे ज्योत जगा के,
तेरा करां दीदार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार,
माँये नी सांनु रख लो सेवादार।
जय जय अम्बे मां।


Maaye Ni Sanu Rakh Lo Sewadar Bhajan By Suresh Ji #vaishnodevi #jaimatadi #bhajan #maa #aarti (भजन)

जब कोई आत्मा माँ के चरणों में अपने दिन का आरंभ और अंत करती है, तो वह संसार के हर काम में उसी प्रकाश को ढूँढने लगती है। दीये की लौ केवल मंदिर में नहीं जलती — वह मन के भीतर भी स्थिर रहती है। सेवादार होना यहाँ किसी नियम या बंधन का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रेम की निरंतर धारा है। यह वह स्थिति है जहाँ व्यक्ति अपने सुख-दुख, अपने मान-अभिमान, सब कुछ समर्पित कर देता है। ऐसा करते हुए वह बंधन से मुक्त होकर भी माँ की सेवा में बंध जाता है — यह वही बंधन है जो आत्मा को शांति देता है। 

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