ईंट ईंट पर जय श्री राम श्री राम भजन

ईंट ईंट पर जय श्री राम श्री राम भजन


हिंदुस्तान में पैदा हो के,
जो श्रीराम का नहीं,
मेरी नज़र में वो इंसान,
किसी काम का नहीं।।

ईंट-ईंट पे जय श्रीराम,
का नाम लिखाएँगे,
होगा मंदिर का निर्माण,
आलीशान बनाएँगे।।

कारसेवकों की ना खाली,
जाएगी कुर्बानी,
राम-नाम पे जान वार गए,
सच्चे हिंदुस्तानी,
उन्हीं शहीदों के सपनों को,
पंख लगाएँगे,
होगा मंदिर का निर्माण,
आलीशान बनाएँगे।।

दुनिया भर में गूँजेगा अब,
जय श्रीराम का नारा,
बच्चा-बच्चा बोल उठेगा,
ये संकल्प हमारा,
मंदिर की चोटी पे हम,
भगवा लहराएँगे,
होगा मंदिर का निर्माण,
आलीशान बनाएँगे।।

उठो राम के प्यारो, जागो,
चलो अवध की ओर,
जय श्रीराम के नारों का,
दुनिया में कर दो शोर,
रामराज की वही अयोध्या,
वापस लाएँगे,
होगा मंदिर का निर्माण,
आलीशान बनाएँगे।।

अटल फैसला लिया है नरसी,
कर लो अब तैयारी,
5 अगस्त को नींव रखेंगे,
मिलकर भगवाधारी,
जगमग होगी राम की नगरी,
दीप जलाएँगे,
होगा मंदिर का निर्माण,
आलीशान बनाएँगे।।

ईंट-ईंट पे जय श्रीराम,
का नाम लिखाएँगे,
होगा मंदिर का निर्माण,
आलीशान बनाएँगे।।


ईंट ईंट पर जय श्री राम EINT EINT PAR JAY SHREE RAM |FULL HD VIDEO NEW RAM BHAJAN 2020 | NARESH NARSI

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❖SONG : EINT EINT PAR JAY SHREE RAM ईंट ईंट पर जय श्री राम 
❖SINGER : NARESH NARSI
❖ MUSIC : BHAGAT MUSIC
❖LYRICIST : NARESH NARSI
❖CREATIVE : SURESH DADHICH 
❖VIDEO : A P FILMS 
❖CATEGORY : RAM BHAJAN
❖LABEL : BHAGAT MUSIC 
❖PRODUCER : COMPLETE SOLUTIONS
❖COPYRIGHTS : BHAGAT MUSIC MUMBAI
 
इस भक्ति-भाव में श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा, आस्था और समर्पण की गहरी अनुभूति प्रकट होती है। प्रभु श्रीराम केवल एक आराध्य ही नहीं, बल्कि सत्य, मर्यादा, न्याय और आदर्श जीवन के प्रतीक हैं। उनके नाम का स्मरण मन में साहस, संयम और धर्म के प्रति निष्ठा का संचार करता है। जब श्रद्धालु अपने आराध्य के प्रति प्रेम व्यक्त करता है, तब उसके भीतर सेवा, त्याग और भक्ति का भाव स्वतः जागृत हो जाता है। अयोध्या का स्मरण केवल एक पवित्र नगरी का स्मरण नहीं, बल्कि उन आदर्शों को अपने जीवन में उतारने की प्रेरणा भी है, जिन्हें श्रीराम ने अपने आचरण से स्थापित किया।

मंदिर श्रद्धा, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना का केंद्र होता है, जहाँ पहुँचकर मन को शांति और आत्मा को संतोष मिलता है। दीपों का प्रकाश, जयघोष और उत्सव का वातावरण भक्तों के हृदय में नई ऊर्जा और आनंद का संचार करता है। सच्ची भक्ति का अर्थ केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि श्रीराम के गुणों—करुणा, मर्यादा, सत्य, धैर्य और लोककल्याण—को अपने व्यवहार में अपनाना भी है। जब जीवन इन आदर्शों से प्रकाशित होता है, तभी प्रभु की आराधना पूर्ण मानी जाती है और समाज में प्रेम, सद्भाव तथा धर्म का प्रकाश फैलता है। जय श्रीराम! 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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