रन चण्डी महाकाली कालका भजन
रन चण्डी महाकाली कालका भजन
रन चण्डी महाकाली कालका,जद रण अंदर वार करे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
रन चण्डी महाकाली कालका।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
जल थल गगन मंडल हिल जावे,
जद हुँकार माँ काली लावे,
काल रूप तक थर-थर कमदे,
असुर दैत्य पानी ना मंगदे,
असुर दैत्य पानी ना मंगदे,
खड़क चक्कर त्रिशूल मैया दा हो,
खड़क चक्कर त्रिशूल मैया दा,
ईको विच मसल दले,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
रन चण्डी महाकाली कालका।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
माँ शक्ति माँ सिंहवाहिनी,
अष्ट भवानी पाप नाशिनी,
अक़्ल चण्डिका सिद्धकालिका माँ,
दानवदल नु दलन वाली माँ,
दानवदल नु दलन वाली माँ,
नरमुण्ड दल विच तांडव नाचे हो
नरमुण्ड दल विच तांडव नाचे,
काल भैरव भी प्राण हरे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
रन चण्डी महाकाली कालका।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
पाप जंजाल विकार मुकावे,
दुर्गा धारी रूप धरावे,
भगतजना दी सदा सहाई,
जय अम्बे जय कालका माई,
जय अम्बे जय कालका माई,
सब दियां रखे मने माँ हो,
सब दियां रखे मने माँ,
सब दियां झोलिया रोज भरे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
जय काली प्रचंड ज्वाला,
दुष्टा दा संघार करे,
रन चण्डी महाकाली कालका।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे,
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
Ran Mein Kud Padi Maha Kali
माँ कालका जब रण में वार करती हैं, तो जल-थल-गगन थर्रा उठता है। उनका हुँकार असुरों को काँपने पर मजबूर कर देता है, चक्र-त्रिशूल से दुष्टों का संहार हो जाता है। सिंह पर सवार होकर शक्ति ज्वाला बन जाती हैं, पापों को भस्म कर देती हैं। नरमुंडों के बीच तांडव नाचती हैं, भक्तों को हर संकट से पार लगाती हैं। काल भैरव भी उनके आगे सिर झुका लेते हैं। ये रूप हमें बताते हैं कि अधर्म के आगे कभी न झुकना, माँ की कृपा से सब जीत जाता है। जीवन की हर लड़ाई में ये साथ देती हैं।
अष्ट भवानी के रूप में माँ भक्तों की सहारा बन जाती हैं, विकारों को जड़ से उखाड़ फेंकती हैं। दुर्गा रूप धारण कर पाप-जंजाल मिटाती हैं, मन की हर थाली भर देती हैं। सदा रक्षा करती हैं, दया बरसाती हैं। साधक जब पुकारते हैं, तो इश्वर का आशीर्वाद उनके जीवन में उतर आता है। ये भक्ति दिल को शांति देती है, ताकत भर देती है। आप सभी पर इश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री कालका माँ जी की।
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