कैलाशपति संग लेके सती भजन

कैलाशपति संग लेके सती शिव भजन

 
कैलाशपति संग लेके सती शिव भजन

कैलाशपति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रह्मजती,
गलती को मति तुम चित लाना।

तुम ही हो पिता तुम ही माता,
मै हूँ याचक तुम हो दाता,
सेवक स्वामी का ये नाता,
मेरे दाता आज निभा जाना,
कैलाशपति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रह्मजती,
गलती को मति तुम चित लाना।

अखियाँ तेरे दर्शन की प्यासी,
तुम दया करो हे कैलाशी,
हे भंडारी घट घट वासी,
अँखियो की प्यास बुझा जाना,
कैलाशपति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रह्मजती,
गलती को मति तुम चित लाना।

हे जगतनाथ हे रामेश्वर,
हे अमरनाथ हे कालेश्वर,
मनकामनेश्वर हे गंगेश्वर,
मन मंदिर बिच समा जाना,
कैलाश पति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रह्मजती,
गलती को मति तुम चित लाना।

तेरी एक नज़र जो हो जाये,
कंकड़ भी मोती बन जाये,
भव से ये दास भी तर जाये,
बस एक झलक दिखला जाना,
कैलाश पति संग लेके सती,
मेरी नैया पार लगा जाना,
इतनी विनती है ब्रह्मजती,
गलती को मति तुम चित लाना।


 
Shiv Bhajan: Kailashpati Sang Leke Sakhi
Album Name: Bhakti Karlo Bhole Ki 
Singer: Kumar Vishu
Music Label: T-Series 
कैलाशपति और उनकी सती संग जीवन की हर मुश्किल में साथ निभाते हैं। जब नैया डगमगाती है, तो ब्रह्माजी की वो दया भरी नजर गलतियां माफ कर हर भटकाव को सीधा कर देती है। पिता-माता जैसे वो हर याचना सुनते हैं, दाता बनकर देते जाते हैं, बस इतनी सी विनती से मन का बोझ हल्का हो जाता है।

अखियां प्यासी हों तो कैलाशी भंडारी हर घट-घट में बसकर वो प्यास बुझा देते हैं। जगतनाथ रामेश्वर से लेकर अमरनाथ गंगेश्वर तक, हर रूप में मनमंदिर सज जाते हैं। एक नजर की जादू से कंकड़ मोती बन जाए, दास भवसागर पार हो जाए—ऐसी करुणा हमें सिखाती है कि प्रेम की एक झलक ही सब कुछ बदल देती है। बस, उस दाता से नाता जोड़ लो, तो जीवन की हर लहर शांत हो जाती।
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