हमारे लाडले ठाकुर करें श्रृंगार प्यारी का भजन
हमारे लाडले ठाकुर करें श्रृंगार प्यारी का भजन
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
फैलाया हाथ गोबिंद ने, कि प्यारी कर करो आगे,
सजाएँ हाथ में चूड़ी, पकड़कर हाथ प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
सजाया कर फूलों को, लगा नथनी बहुत हरषै,
सितारों से बना टीका, सजावें भाल प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
लिए घुटनों पे चरणों को, लगे मेहंदी
लगाने वो,
छलकते आँख के आँसू, पखारें चरण प्यारी
के।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
पीतांबर से चरण पोंछे, फिर सजा दी पाँव में पायल,
उसी पायल की रुनझुन में, खो गया दिल बिहारी का।
जो खुद सुंदर से सुंदर हैं, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
बनाते हैं जो दुनिया को, लगे वेणी बनाने वो,
ओढ़ाकर शीश पर चुनरी, करें मनुहार प्यारी का।
जो खुद सुंदर से सुंदर हैं, करें श्रृंगार प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
दोई कर जोड़ कर बैठे, लगे एकटक निहारन को,
बहे राजीव लोचन प्यार पाने, श्यामा प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
फैलाया हाथ गोबिंद ने, कि प्यारी कर करो आगे,
सजाएँ हाथ में चूड़ी, पकड़कर हाथ प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
सजाया कर फूलों को, लगा नथनी बहुत हरषै,
सितारों से बना टीका, सजावें भाल प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
लिए घुटनों पे चरणों को, लगे मेहंदी
लगाने वो,
छलकते आँख के आँसू, पखारें चरण प्यारी
के।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
पीतांबर से चरण पोंछे, फिर सजा दी पाँव में पायल,
उसी पायल की रुनझुन में, खो गया दिल बिहारी का।
जो खुद सुंदर से सुंदर हैं, निहारें रूप प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
बनाते हैं जो दुनिया को, लगे वेणी बनाने वो,
ओढ़ाकर शीश पर चुनरी, करें मनुहार प्यारी का।
जो खुद सुंदर से सुंदर हैं, करें श्रृंगार प्यारी का,
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
दोई कर जोड़ कर बैठे, लगे एकटक निहारन को,
बहे राजीव लोचन प्यार पाने, श्यामा प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का,
जो खुद सुंदर से सुंदर है, निहारें रूप प्यारी का।
हमारे लाडले ठाकुर, करें श्रृंगार प्यारी का।
New 2020 सबसे सुंदर भजन हमारे लाडले ठाकुर करें शृंगार प्यारी का , श्री राजीव शास्त्रीजी
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Humare Ladle thakur kare Shringaar pyaari ka rajeev shastri ji
Copyright :- Shree Radha
Voice- Shree Rajeev Shastri Ji
Lyrics- Shree Rajeev Shastri Ji
Music- Live
Copyright :- Shree Radha
Voice- Shree Rajeev Shastri Ji
Lyrics- Shree Rajeev Shastri Ji
Music- Live
राधा और श्रीकृष्ण का प्रेम केवल आकर्षण का नहीं, बल्कि पूर्ण समर्पण, आत्मीयता और दिव्य माधुर्य का अद्भुत स्वरूप है। जब स्वयं समस्त सृष्टि के स्वामी अपनी प्रियतम का श्रृंगार करते हैं, तब यह दृश्य प्रेम की उस ऊँचाई को प्रकट करता है जहाँ अहंकार का कोई स्थान नहीं रहता। प्रत्येक आभूषण, प्रत्येक पुष्प और प्रत्येक स्पर्श में स्नेह, सम्मान और आत्मिक अनुराग झलकता है। चरणों में मेहंदी सजाते समय प्रेम से छलकते आँसू यह अनुभव कराते हैं कि सच्चे प्रेम में सेवा ही सबसे बड़ा सौभाग्य होती है। पायल की मधुर रुनझुन, चुनरी की कोमल छाया और मनोहर श्रृंगार से पूरा वातावरण प्रेमरस में डूब जाता है। उस दिव्य मिलन को देखकर मन भी संसार की सभी इच्छाओं को भूलकर उसी माधुर्य में खो जाना चाहता है। यह प्रेम किसी अधिकार का नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान, समर्पण और आनंद का उत्सव है। ऐसे अलौकिक भाव हृदय को निर्मल बनाते हैं और यह प्रेरणा देते हैं कि जहाँ प्रेम में विनम्रता, सेवा और श्रद्धा हो, वहीं ईश्वर का वास्तविक निवास होता है।
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Author - Saroj Jangir
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