राम आए जी घर मेरे मैं शगुन मनावां भजन
राम आए जी घर मेरे मैं शगुन मनावां भजन
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
मैं, शगुन, मनावां तेरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
भीलणी दे, घर देखो, आए अज्ज, राम जी।
बेरां दा, भोग, लगाए, भगवान जी।
सोहणे, दर्शन... जय हो, पावां तेरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
कदों दी सी, आस मैनूं, तेरे ही, दीदार दी।
घड़ी अज्ज, मुक्की प्रभु, तेरे इंतज़ार दी।
मैं तां, लै आई... जय हो, फुल्लां वाले सेहरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
किरपा है, कीती तुसीं, मेरे जेही, दासी ते।
बड़े भाग, लाए दिन, आया, वडभागी वे।
मेरे, खिल गए... जय हो, मन दे चेहरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
मैं, शगुन, मनावां तेरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
भीलणी दे, घर देखो, आए अज्ज, राम जी।
बेरां दा, भोग, लगाए, भगवान जी।
सोहणे, दर्शन... जय हो, पावां तेरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
कदों दी सी, आस मैनूं, तेरे ही, दीदार दी।
घड़ी अज्ज, मुक्की प्रभु, तेरे इंतज़ार दी।
मैं तां, लै आई... जय हो, फुल्लां वाले सेहरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
किरपा है, कीती तुसीं, मेरे जेही, दासी ते।
बड़े भाग, लाए दिन, आया, वडभागी वे।
मेरे, खिल गए... जय हो, मन दे चेहरे,
मैं, शगुन, मनावां तेरे।
राम, आए जी, आए जी, घर मेरे।
तुसी आए जी आए जी घर मेरे मैं शगन मनावां तेरे हरे कृष्णा हरे राम
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प्रभु के आगमन का अनुभव किसी भक्त के लिए जीवन का सबसे बड़ा उत्सव होता है। जब हृदय में यह भावना जागती है कि स्वयं भगवान उसके घर और जीवन में पधारे हैं, तब मन आनंद, कृतज्ञता और प्रेम से भर उठता है। यह सुख किसी सांसारिक उपलब्धि से कहीं अधिक महान होता है। प्रभु को बाहरी वैभव नहीं, बल्कि प्रेम से भरा हुआ निर्मल हृदय प्रिय होता है। यही कारण है कि उन्होंने सदैव निष्कपट भक्ति को स्वीकार किया और अपने भक्तों के प्रेम को सबसे ऊँचा स्थान दिया। लंबे समय से प्रतीक्षा में डूबा मन जब अपने आराध्य का सान्निध्य पाता है, तब उसकी सारी व्याकुलता समाप्त हो जाती है। ऐसा लगता है मानो जीवन की हर अधूरी इच्छा पूर्ण हो गई हो और हृदय का हर कोना प्रकाश से भर गया हो। प्रभु की कृपा को अपने ऊपर अनुभव करना सबसे बड़ा सौभाग्य है, क्योंकि उनकी एक झलक ही मन के दुख, भय और अकेलेपन को दूर कर देती है। उनका आगमन केवल घर में नहीं, बल्कि आत्मा में मंगल और आनंद का दीप प्रज्वलित कर देता है, जिससे पूरा जीवन धन्य और सार्थक प्रतीत होने लगता है।
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Author - Saroj Jangir
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