मेरे मालिक दी किरपा बहुत पर मेरा चित नही भरदे

मेरे मालिक दी किरपा बहुत पर मेरा चित नही भरदे

मेरे मालिक दी किरपा बहुत, पर मेरा चित्त नहीं भरदे,
गद्दी छोटी मंगी मिली, ते हुण बड़ी नूं जी करदा,
मेरे मालिक दी किरपा बहुत।।

इक मंग पूरी होण सार ही, दूजी खींच लै तयारी,
एह भी मालका पूरी कर दे, दिल सदके लाख वारी,
सोचां वाले दरिया दे विच, मनवा डगमग करदा,
गद्दी छोटी मंगी मिली, ते हुण बड़ी नूं जी करदा,
मेरे मालिक दी किरपा बहुत।।

दस न देखी जो दितीयां ने, इक दी चिंता रहंदी,
ऐसे घेरे फसी मरजानी, तरसी उठ दी बेहंदी,
इक न देवे, दस भी हर लै, इस तो क्यों नहीं डरदे,
गद्दी छोटी मंगी मिली, ते हुण बड़ी नूं जी करदा,
मेरे मालिक दी किरपा बहुत।।

दीप जो देवे मालिक, लै के सिख लै रज़ा विच रहना,
जो किस्मत विच लिख्या तेरा, ओही पल्ले पैणा,
ध्यान गुरां दे रख चरणा विच, देख चढ़ाइयां चढ़ दे,
गद्दी छोटी मंगी मिली, ते हुण बड़ी नूं जी करदा,
मेरे मालिक दी किरपा बहुत।।


Malik Di Kirpa I V-Nay I Punjabi Sufi Song I Full Audio Song

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Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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