मुकुट सिर स्वर्ण का मेरे गजानंद का भजन

मुकुट सिर स्वर्ण का मेरे गजानंद का भजन

मुकुट सिर स्वर्ण का,
मेरे गजानंद का,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं।।

भक्तों का गजमुख इनका,
रूप सुहाया है,
सब देवों में इनका,
गुणगान गाया है,
मूषक के असवार हैं,
ये सांचे अवतार हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं।।

एकदंत दयावंता,
चार भुजा धारी हैं,
माथे तिलक सुहाए,
बप्पा दातारी हैं,
प्रथम तेरा नाम है,
ये सांचे भगवान हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं।।

रिद्धि-सिद्धि, बल और बुद्धि,
के ये प्रदाता हैं,
सुखकर्ता, दुःख के हर्ता,
धन-धान्य दाता हैं,
जो हृदय में धार ले,
तो भव से ये तार दें,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं।।

मुकुट सिर स्वर्ण का,
मेरे गजानंद का,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं,
माँ गौरा के ये लाल हैं,
देव ये कमाल हैं।।


बुधवार सुबह गणपति का भजन सुनकर नाचने लगोगे : माँ गौरा के ये लाल है देव ये कमाल है : MukutSirSwarnKa

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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