मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे भजन
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे भजन
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
मैं राम नाम रटकर फिर भी सहूँगा दुःख तो,
बदनामियों से कैसे गुमनाम आप होंगे,
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
नैनों से प्रेमजल की बरसात तभी तो होगी,
घन बनकर जब हृदय में घनश्याम आप होंगे,
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
राजेश है तुम्हारा, तू उसके दोष बुनके,
आगाज़ आप होंगे, अंजाम आप होंगे,
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
मैं राम नाम रटकर फिर भी सहूँगा दुःख तो,
बदनामियों से कैसे गुमनाम आप होंगे,
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
नैनों से प्रेमजल की बरसात तभी तो होगी,
घन बनकर जब हृदय में घनश्याम आप होंगे,
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
राजेश है तुम्हारा, तू उसके दोष बुनके,
आगाज़ आप होंगे, अंजाम आप होंगे,
मेरे गम से बेखबर गर श्रीराम आप होंगे,
बर्बाद मैं हुआ तो बदनाम आप होंगे।
राम भजन मेंरे गम से बेखबर श्री राम आप होगे अंकुश जी
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इस भजन में प्रभु और भक्त के बीच का संबंध अत्यंत आत्मीय, निश्छल और विश्वास से भरा हुआ दिखाई देता है। मन अपने आराध्य के सामने किसी औपचारिकता के साथ नहीं, बल्कि अपनेपन के अधिकार से अपनी पीड़ा रखता है। यही विश्वास उसे बार-बार प्रभु की शरण में ले आता है। संसार चाहे कितने ही दुःख और अपमान दे, फिर भी हृदय से प्रभु का नाम नहीं छूटता, क्योंकि वही जीवन का सबसे बड़ा सहारा है। भक्त को यह अटल भरोसा रहता है कि दयालु प्रभु अपने शरणागत को कभी असहाय नहीं छोड़ सकते। प्रेम के आँसू कमजोरी नहीं, बल्कि गहरी भक्ति और अटूट समर्पण की पहचान होते हैं। जब हृदय में प्रभु का निवास हो जाता है, तब हर पीड़ा सहने की शक्ति अपने आप मिल जाती है और निराशा की जगह आशा जन्म लेती है। अपने दोषों और कमजोरियों को स्वीकार करके प्रभु की कृपा माँगना ही सच्ची विनम्रता है। अंततः यही भावना मन को अहंकार से मुक्त करती है और प्रभु के चरणों में ऐसा विश्वास जगाती है, जहाँ हर दुःख छोटा और उनकी करुणा सबसे बड़ी प्रतीत होती है।
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Author - Saroj Jangir
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