दीवाना मैं तो मोहन का जग समझे मैं बौराना

दीवाना मैं तो मोहन का जग समझे मैं बौराना


दीवाना मैं तो मोहन का,
जग समझे मैं बौराना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।

वो राधा रानी वाले हैं,
आँखों में काजल डाले हैं,
आँखों की चितवन है ऐसे,
जैसे छलके पैमाना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।

वो मोर मुकुटिया वाले हैं,
कानों में कुंडल डाले हैं,
चेहरे की छटा देखी जबसे,
मैं हो गया मस्ताना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।

वो गीता गाने वाले हैं,
ऊँगली पर चक्र सँभाले हैं,
मुरली की ताने सुन-सुन कर,
हूँ खुद से अंजाना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।

मीरा का गिरधर गोपाला,
जो विष को अमृत कर डाला,
गीता का ज्ञान सुनाया था,
जब अर्जुन अकुलाना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।

वो रास रचाने वाले हैं,
नख में गिरिराज सँभाले,
‘राजेन्द्र’ कहे है राधावर,
कुछ दे दो नज़राना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।

दीवाना मैं तो मोहन का,
जग समझे मैं बौराना,
दीवाना मैं तो मोहन का।।


दीवाना मैं तो मोहन का जग समझे

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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