रहे भगतों के सिर पे सदा तेरी चुनरी मां भजन

रहे भगतों के सिर पे सदा तेरी चुनरी मां भजन

 
रहे भगतों के सिर पे सदा तेरी चुनरी मां भजन

रहे भगतों के सिर पे सदा तेरी चुनरी मां,
हमें प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी मां,
रहे भगतों के सिर पे सदा तेरी चुनरी मां,
हमें प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी मां।

एक तो तेरा भवन रामगढ़ दूजा फतेहपुर धाम,
जिसने शीश झुकाया आकर उसके बन गए काम,
दोनों हैं धाम तेरे हैं पावन नगरी माँ,
हमें प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ।

सेडूराम जी हरितवाल का तूने वंश बढ़ाया,
सदा राम को तूने दादी सच्चा मार्ग दिखाया।
आज भी कर्जदार हैं हम सारे चौधरी माँ,
हमें प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ।

तेरी कृपा से मौज उड़ाते तेरे बेटे-पोते,
सौरव मधुकर चिंता कैसी दादी तेरे होते।
तेरे ही चरणों में रख दी पगड़ी माँ,
हमें प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी माँ।

रहे भगतों के सिर पे सदा तेरी चुनरी मां,
हमें प्राण से भी प्यारी तू छाजल अमरी मां।


प्राणों से प्यारी श्री छाजल अमरी दादी | Chhajal Amri Sati Dadi Bhajan | Saurabh Madhukar

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रामगढ़ और फतेहपुर—दोनों धाम माँ की पावन नगरी हैं। जिसने भी वहाँ जाकर अपना शीश झुकाया, उसके कार्य सिद्ध हो गए, मानो माँ ने उनकी झोली भर दी हो। यह विश्वास माँ के उस अनंत करुणा-भाव को दर्शाता है जो भक्त के लिए हर स्थान को तीर्थ बना देती है।
 
Saroj Jangir Author Admin - Saroj Jangir

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