तूँ मुड़ के नहीं औना बंदेया भजन
तूँ मुड़ के नहीं औना बंदेया
ਮੈਂ ਮਿੱਟੀ, ਮੇਰੀ ਜਾਤ ਵੀ ਮਿੱਟੀ,
मैं मिट्टी, मेरी जात भी मिट्टी,
ਤੇ ਮੇਰੇ ਗਲ਼, ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਬਾਣਾ।
ते मेरे गले, मिट्टी का बाना।
ਮਾਂ ਮੇਰੀ ਨੇ, ਮਿੱਟੀ ਜੰਮੀ,
मां मेरी ने, मिट्टी जनी,
ਬਾਬਲ, ਮਿੱਟੀ ਖਾਣਾ।
बाबल, मिट्टी खाना।
ਮਿੱਟੀ ਜੰਮੀ, ਖੁਸ਼ੀ ਮਨਾਈ,
मिट्टी जनी, खुशी मनाई,
ਨਾਂਅ ਰੱਖਿਆ, ਮਰ ਜਾਣਾ।
नाम रखा, मर जाना।
ਜਦ ਮਿੱਟੀ ਨੇ, ਮਿੱਟੀ ਛੱਡੀ,
जब मिट्टी ने, मिट्टी छोड़ी,
ਓ ਢੁੱਕ ਢੁੱਕ, ਪੈਣ ਮਕਾਣਾਂ।।
ओ ढुक ढुक, पैण मकाना।।
)
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ,
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां,
ਬੰਦਿਆ, ਤੂੰ ਮੁੜ੍ਹ ਕੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ।।
बंदिया, तू मुड़ के नहीं आउणा।।
ਤੂੰ ਮੁੜ੍ਹ ਕੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ।।
तू मुड़ के नहीं आउणा।।
ਲੱਖ ਚੌਰਾਸੀ, ਜੂਨ ਕੱਟਣ ਨੂੰ।।
लख चौरासी, जून कट्टण नूं।।
ਆਈ ਸੀ ਤੂੰ, ਨਾਮ ਜੱਪਣ ਨੂੰ।।
आई सी तू, नाम जपण नूं।।
ਨੀ, ਬਹਿ ਗਈ, ਸਮਝ ਖਿਡੌਣਾ।
नी, बैठ गई, समझ खिलौना।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਮੈਂ ਮੇਰੀ ਵਿੱਚ, ਆ ਕੇ ਪੈ ਗਈ।।
मैं मेरी विच, आ के पै गई।।
ਨਾਮ ਬਿਨਾਂ ਤੂੰ, ਖ਼ਾਲੀ ਰਹਿ ਗਈ।।
नाम बिना तू, खाली रहि गई।।
ਇਥੋਂ ਕੁਝ ਨੀ ਨਾਲ ਹੈ ਜਾਣਾ।
इथों कुछ नी नाल है जाना।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਜਨਮ ਬੜਾ, ਅਨਮੋਲ ਹੈ ਤੇਰਾ।।
जनम बड़ा, अनमोल है तेरा।।
ਛੱਡ ਦੇ ਕਰਨਾ, ਝਗੜਾ ਝੇੜਾ।।
छड्ड दे करना, झगड़ा झेड़ा।।
ਤੂੰ, ਸਿੱਖ ਲੈ, ਜਾਨ ਬਚਾਉਣਾ।
तू, सिख लै, जान बचाणा।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਧੰਨ ਸ਼ੋਹਰਤ, ਤੇਰੀ ਵਿਰਥਾ ਜਾਵੇ।।
धन शोहरत, तेरी विरथा जावे।।
ਲੰਘਿਆ ਵੇਲਾ, ਹੱਥ ਨਾ ਆਵੇ।।
लंग्या वेला, हाथ ना आवे।।
ਤੂੰ, ਛੱਡ ਦੇ, ਕੂੜ੍ਹ ਕਮਾਉਣਾ।
तू, छड्ड दे, कूड़ कमाणा।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
मैं मिट्टी, मेरी जात भी मिट्टी,
ਤੇ ਮੇਰੇ ਗਲ਼, ਮਿੱਟੀ ਦਾ ਬਾਣਾ।
ते मेरे गले, मिट्टी का बाना।
ਮਾਂ ਮੇਰੀ ਨੇ, ਮਿੱਟੀ ਜੰਮੀ,
मां मेरी ने, मिट्टी जनी,
ਬਾਬਲ, ਮਿੱਟੀ ਖਾਣਾ।
बाबल, मिट्टी खाना।
ਮਿੱਟੀ ਜੰਮੀ, ਖੁਸ਼ੀ ਮਨਾਈ,
मिट्टी जनी, खुशी मनाई,
ਨਾਂਅ ਰੱਖਿਆ, ਮਰ ਜਾਣਾ।
नाम रखा, मर जाना।
ਜਦ ਮਿੱਟੀ ਨੇ, ਮਿੱਟੀ ਛੱਡੀ,
जब मिट्टी ने, मिट्टी छोड़ी,
ਓ ਢੁੱਕ ਢੁੱਕ, ਪੈਣ ਮਕਾਣਾਂ।।
ओ ढुक ढुक, पैण मकाना।।
)
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ,
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां,
ਬੰਦਿਆ, ਤੂੰ ਮੁੜ੍ਹ ਕੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ।।
बंदिया, तू मुड़ के नहीं आउणा।।
ਤੂੰ ਮੁੜ੍ਹ ਕੇ ਨਹੀਂ ਆਉਣਾ।।
तू मुड़ के नहीं आउणा।।
ਲੱਖ ਚੌਰਾਸੀ, ਜੂਨ ਕੱਟਣ ਨੂੰ।।
लख चौरासी, जून कट्टण नूं।।
ਆਈ ਸੀ ਤੂੰ, ਨਾਮ ਜੱਪਣ ਨੂੰ।।
आई सी तू, नाम जपण नूं।।
ਨੀ, ਬਹਿ ਗਈ, ਸਮਝ ਖਿਡੌਣਾ।
नी, बैठ गई, समझ खिलौना।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਮੈਂ ਮੇਰੀ ਵਿੱਚ, ਆ ਕੇ ਪੈ ਗਈ।।
मैं मेरी विच, आ के पै गई।।
ਨਾਮ ਬਿਨਾਂ ਤੂੰ, ਖ਼ਾਲੀ ਰਹਿ ਗਈ।।
नाम बिना तू, खाली रहि गई।।
ਇਥੋਂ ਕੁਝ ਨੀ ਨਾਲ ਹੈ ਜਾਣਾ।
इथों कुछ नी नाल है जाना।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਜਨਮ ਬੜਾ, ਅਨਮੋਲ ਹੈ ਤੇਰਾ।।
जनम बड़ा, अनमोल है तेरा।।
ਛੱਡ ਦੇ ਕਰਨਾ, ਝਗੜਾ ਝੇੜਾ।।
छड्ड दे करना, झगड़ा झेड़ा।।
ਤੂੰ, ਸਿੱਖ ਲੈ, ਜਾਨ ਬਚਾਉਣਾ।
तू, सिख लै, जान बचाणा।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਧੰਨ ਸ਼ੋਹਰਤ, ਤੇਰੀ ਵਿਰਥਾ ਜਾਵੇ।।
धन शोहरत, तेरी विरथा जावे।।
ਲੰਘਿਆ ਵੇਲਾ, ਹੱਥ ਨਾ ਆਵੇ।।
लंग्या वेला, हाथ ना आवे।।
ਤੂੰ, ਛੱਡ ਦੇ, ਕੂੜ੍ਹ ਕਮਾਉਣਾ।
तू, छड्ड दे, कूड़ कमाणा।
ਰੁੱਤਾਂ, ਮੁੜ੍ਹ ਮੁੜ੍ਹ ਆਉਣਗੀਆਂ।
ऋतुएं, मुड़ मुड़ आऊण गियां।
ਜਿੰਦੜੀਏ ਤੂੰ ਮੁੜ ਕੇ ਨੀ ਆਉਣਾ ( ਸੰਤ ਸਤਨਾਮ ਦਾਸ ਜੀ ) ਡੇਰਾ ਸੰਤ ਬਾਬਾ ਰਾਂਝੂ ਦਾਸ ਜੀ ਮਹਿਦੂਦ 9417177756
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जीवन की ये सच्चाई कितनी कड़वी लेकिन कितनी साफ है। हम सब मिट्टी से बने हैं, मिट्टी ही हमारी जात है, मिट्टी का ही ये शरीर पहना हुआ है। माँ ने मिट्टी से जन्म दिया, बाप ने मिट्टी खाई, खुशी से नाम रखा गया, पर अंत में मिट्टी में ही लौट जाना है। जब ये मिट्टी मिट्टी से अलग होती है तो घर-मकान बनते हैं, ढुक-ढुक धड़कन चलती है, पर ये सब थोड़े दिन का खेल है। ऋतुएँ बार-बार आएँगी-जाएँगी, फसलें लहलहाएँगी, पत्ते झड़ेंगे, लेकिन इंसान एक बार गया तो मुड़कर नहीं आता। लाख चौरासी जन्मों के बाद ये कीमती मनुष्य जन्म मिला था नाम जपने के लिए, पर हम खिलौनों में उलझ गए, समझ बैठ गए कि यही सब कुछ है। नाम बिना मन खाली रह गया, और जो कुछ भी इकट्ठा किया वो यहीं छूट जाएगा।
इसलिए ये जन्म व्यर्थ न जाने दो। झगड़े-झेले छोड़ दो, धन-शोहरत की दौड़ में मत पड़ो, क्योंकि समय हाथ से निकल गया तो कुछ नहीं आएगा। नाम जप लो, मन को साफ कर लो, जान को बचा लो। ये नाम ही वो साथी है जो अंत तक जाता है। ऋतुएँ तो फिर लौट आएँगी, पर तू नहीं आएगा। ये सोच दिल को झकझोर देती है, जैसे कोई पुराना दोस्त आकर कह रहा हो, “भाई, वक्त कम है, नाम ले ले, बोझ उतार ले।” जीवन हल्का हो जाएगा, मौत के दर पर भी डर नहीं लगेगा, क्योंकि नाम की रोशनी साथ होगी।
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Admin - Saroj Jangir
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