आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा भजन

आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा भजन

आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा भजन

आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा,
चिमटे वाला जोगी आया वैद रोगियों दा,
आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा,
सोहनियां जटा जड़ावां वाला,
टेढ़ लंगोट खड़ावां वाला,
धन्न धन्न बाबा बालक नाथ,
पूरी करता सभ दी आस,
रहिंदा राम नाम विच जुड़िया,
छड्ड के संग लोभियों दा,
आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा ।

चिमटे वाला जोगी आया वैद रोगियों दा,
आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा,
बाबा बालक नाथ आया वैद रोगियों दा ।

मा रतनौ दे बझा प्रेम ते प्यार दा,
जंगलां च फिरदा ऐ गूआं चारदा,
शिव शिव शंकर गाउंदा ऐ,
लम्मी ला के समाधी बैठदा,
रब्ब दे रंग विच रंगिया रहिंदा,
जग्ग दा ख्याल भुलाऊंदा ऐ,
गूआं देंदियां खेत उजार,
उलांभे आउंदे ने कई वार,
मस्त मलंग मालिक दे संग,
प्रीतां पाईआं कहंदा सांईआं,
भेद ना पाया किसे,
खेडां थोड़ीआं दा,
आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा ।

निका जेहा इक जोगी सहीयो,
ला के धूणे बैठदा ऐ,
मैं क्ली नहीं कहंदी सहीयो,
एह जग्ग सारा कहंदा ऐ,
रूप खुदा दा सिद्धा सादा,
बोहर दी छांवें तल्ले भावें,
बैठदा ला समधी लम्मी,
वाज़ां मार जगावे अम्मी,
अखां खोले ना कुछ बोले,
मान रखे सोझियां दा,
आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा ।

चाहल गुरदेव जोगी चिमटे वाला,
नाम दा चिमटा वजाउंदा ऐ,
बड़ा प्यारा लगदा ऐ जद,
गूआं दे मोड़े लाउंदा ऐ,
शाह तलाइयां विच रुशनाइयां,
कर गया नी पुत्तर रतनौ दा,
साहिब चाहल अज संगतां आउंदियां,
दर ते चढ़ाउंदियां रोट पकां,
पूरी हुंदी सभ दी आस,
करदा जो आ के अरदास,
मूंहों मंगियां मुरादां पाउंदा,
जो वी श्रद्धा दे नाल आउंदा,
सभ दुख कट्टे बोलन सच्चे,
ऐसी निगाह मेहर दी तक्के,
करे नितारा बने सहारा,
जिंदा जिउण जोगियां दा,
आ गया नी जोगी वैद रोगियों दा ।



Jogi Vaid Rogian Da |Gurdev Chahal| Sahib Chahal| SSS

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भक्ति भाव में लीन वातावरण में जब वह योगी आता है, तो सबके हृदयों में शांति और विश्वास की लहर दौड़ जाती है। उसके आगमन को औषधि समान माना गया है, जैसे किसी वैद्य ने रोगियों के दुख हर लिए हों। उसके चिमटे की ध्वनि केवल धातु की झंकार नहीं, बल्कि नाम-स्मरण की गूंज है, जो हर व्याकुल आत्मा को सुकून देती है। जटा और खड़ाओं से सुसज्जित वह योगी भौतिक आकर्षणों से परे, केवल परमात्मा में रमा है। उसे कोई लोभ नहीं स्पर्श सकता क्योंकि उसका जीवन राम नाम की डोर से बंधा है। उसकी समाधि, उसका मौन और उसकी मस्ती स्वयं इस बात के प्रतीक हैं कि जो ईश्वर में डूब जाता है, उसे संसार के विकार नहीं डिगा सकते। वह जो कुछ करता है—लोगों की आशाएं पूरी करना, दुख हरना या किसी के जीवन में प्रकाश लाना—सब ईश्वरीय प्रेरणा से होता है, क्योंकि उसमें ईश्वर का अंश ही जीवित है।
 
Tittle: Jogi Vaid Rogian Da
Singer: Gurdev Chahal
Lyrics: Gurdev Chahal
Music: Sahib Chahal
Composer: Sahib Chahal
Label: Simran Sukh Sagar (SSS) 
 
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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