होली खेले गोकुल में कन्हैया होली खेले रे कन्हैया

होली खेले गोकुल में कन्हैया होली खेले रे कन्हैया


होली खेले गोकुल में कन्हैया,
होली खेले रे कन्हैया।
हिलमिल गाएँ गोपी-गोपाला,
रंग लगा के हुआ मतवाला।
होली खेले गोकुल में कन्हैया...

राधा संग रास रचाए,
बड़ा रंगीला कन्हैया।
रंग लगाए, गुलाल उड़ाए,
सब गोपियों को पास बुलाए।
राधा संग रास रचाए,
बड़ा रंगीला कन्हैया।
होली खेले गोकुल में कन्हैया...

कान्हा मेरा रंगीला,
सुनो गोकुल के गोपाला।
बरस-बरस के होली आवे,
सबके मन को कान्हा रिझावे।
रंगों में डूबा कन्हैया,
सब पर रंग डाले कन्हैया।
हिलमिल गाएँ गोपी-गोपाला,
रंग लगा के हुआ मतवाला।
होली खेले गोकुल में कन्हैया...



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इस भजन में गोकुल की होली का रंगीन, उल्लासपूर्ण और प्रेममय वातावरण चित्रित है। कन्हैया (कृष्ण) गोपियों और ग्वालों के साथ होली खेलते हैं, सब एक-दूसरे पर रंग और गुलाल लगाते हैं, और पूरे गोकुल में आनंद की लहर दौड़ जाती है। राधा के संग कृष्ण की रासलीला, उनका रंगों में डूबा रूप, और गोपियों को पास बुलाकर प्रेमपूर्वक रंग लगाना—इन सब दृश्यों में कृष्ण का रंगीला, चंचल और प्रेममय स्वभाव झलकता है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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