ओ सांवरे शरण में आई जगत से हार के

ओ सांवरे शरण में आई जगत से हार के


ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।
जो भी जग से हारा,
दिया तूने सहारा,
सुनकर के मैं भी आई,
शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।
ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के।।

अपनों ने अपना बनकर लूटा,
अपनों ने अपना बनकर लूटा,
सारा जगत अब लागे है झूठा।
फिरूं मैं तो मारी मारी,
समझो ना लाचारी,
तेरी दुनिया रास ना आई,
शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।।

राधा जैसी शक्ति नहीं है,
मीरा जैसी भक्ति नहीं है।
कैसे तुझको रिझाऊं,
कैसे तुझको मनाऊं,
असुवन की झड़ी लगाई,
शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।।

निर्बल का बल तुम कहलाते,
शरणागत की लाज बचाते।
मुझे गले लगा ले,
मुझे अपना बना ले,
ये 'श्याम' ने अर्जी लगाई,
शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।।

ओ सांवरे शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।
जो भी जग से हारा,
दिया तूने सहारा,
सुनकर के मैं भी आई,
शरण में आईं,
जगत से हार के, शरण में आईं।।


जगत से हार कर बाबा द्वारा तेरे पै आया हू(जय श्री श्याम) सिंगर मनोज बघेल राजा हिंदुस्तानी#manojbaghel

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मनुष्य जब संसार की कठिनाइयों, छल-कपट और अपने ही लोगों की बेवफाई से टूट जाता है, तब उसे जीवन में सच्चा सहारा केवल ईश्वर की शरण में ही मिलता है। जब दुनिया की मोह-माया, रिश्तों की निष्ठुरता और जीवन की निराशा उसे घेर लेती है, तब वह सब कुछ छोड़कर प्रभु के द्वार पर आकर सच्चे मन से शरणागत हो जाता है। संसार की असत्यता और अपनेपन के दिखावे से आहत होकर, मन ईश्वर की ओर भागता है, क्योंकि वही एकमात्र है जो हर दुख में साथ देता है, हर हार में सहारा बनता है। भक्ति और शक्ति की कमी के बावजूद, जब आंखों से आंसुओं की धारा बहती है, तब भी प्रभु की करुणा सच्चे मन की पुकार को जरूर सुनती है।

श्रीकृष्ण, जिन्हें सांवरे या श्याम कहा जाता है, सच्चे शरणागतों के रक्षक और निर्बलों के बल हैं। उनका चरित्र करुणा, प्रेम और दया से भरा हुआ है। वे मीरा की भक्ति और राधा की शक्ति के प्रतीक हैं, लेकिन वे केवल महान भक्तों के ही नहीं, बल्कि हर उस प्राणी के अपने हैं, जो सच्चे मन से उनकी शरण में आता है। श्रीकृष्ण अपने भक्तों की लाज रखने वाले, उनके दुख हरने वाले और उन्हें अपनाने वाले हैं। वे संसार के छल और माया से टूटे हुए हृदय को स्नेहपूर्वक गले लगाते हैं, उसकी पीड़ा को समझते हैं और उसे अपनाकर अपने दिव्य प्रेम से भर देते हैं। उनकी शरण में आने वाला हर जीव स्वयं को सुरक्षित, शांत और पूर्ण अनुभव करता है।

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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