पी ले अमीरस धारा गगन में झड़ी लगी

पी ले अमीरस धारा गगन में झड़ी लगी

पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी,
झड़ी लगी यहाँ झड़ी लगी,
पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी।।

बूंद का प्यासा घड़ा भर पाया,
सपने में वो स्वाद न आया,
कोई किसे कैसे समझाए,
एक बूंद की तरण लगी,
पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी।।

प्यास बिना क्या पीवे है पानी,
प्यास अकेली ये है वो पानी,
बिना अधिकार कोई नहीं जानी,
अमृत रस की झड़ी लगी,
पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी।।

अमीरस पीवे, अमर पद पावे,
भव योनि में कभी नहीं आवे,
जरा मरण का दुख नसावे,
घट की गगरिया भरण लगी,
पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी।।

बूंद अमीरस गुरु जी की वाणी,
जीवन रास्ता है यह पानी,
कबीर संगत में हो हमारी,
डाली प्रेम की हरी लगी,
पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी।।

पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी,
झड़ी लगी यहाँ झड़ी लगी,
पी ले अमीरस धारा,
गगन में झड़ी लगी।।


यूट्यूब पर पहेली बार बहुत_ही_पुराणा_निर्गुणी_भजन || स्वर~बद्रीलाल जी गाडरी‪@Mahakal_Live‬

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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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