स्वागत है मेरी पोस्ट में, इस लेख में हम जानेंगे "नन्ही परी और रानी की कहानी"। यह कहानी हमें ईर्ष्या, लालच, और सच बोलने के महत्व की सीख देती है। चलिए, इस प्रेरणादायक कहानी को सरल भाषा में पढ़ते हैं और इसके अंत में जो महत्वपूर्ण शिक्षा छिपी है, उसे समझते हैं।
नन्ही परी और रानी की कहानी fairy tales
बहुत समय पहले की बात है, एक राज्य था जिसका नाम था विक्रमगढ़। इस राज्य के राजा की दो रानियां थीं। बड़ी रानी साधारण रूप-रंग की थीं, जबकि छोटी रानी बहुत सुंदर और आकर्षक थीं। सुंदर और आकर्षक होने के कारण राजा को छोटी रानी से अधिक लगाव था और वह उसकी हर बात मानते थे।
एक दिन, छोटी रानी ने राजा से बड़ी रानी की शिकायत कर दी। राजा बिना सोचे समझे बड़ी रानी से नाराज हो गए। दुखी होकर बड़ी रानी महल छोड़कर जंगल की ओर चल दीं। चलते चलते रानी थक गई। थोड़ी देर बाद वह एक नदी के किनारे पहुंचीं। वहां एक अनार का पेड़ था। उदास रानी उस पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगीं।
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बड़ी रानी के रोने की आवाज सुनकर एक नन्ही परी वहां प्रकट हुई। उसने रानी से पूछा, “आप क्यों रो रही हैं?”बड़ी रानी ने अपनी पूरी कहानी परी को सुना दी।परी ने मुस्कुराते हुए कहा, “इस नदी में तीन बार डुबकी लगाओ और फिर उस अनार के पेड़ से एक अनार तोड़ लो। लेकिन ध्यान रखना, जितना कहा है उतना ही करना न कम, न ज्यादा।”परी ने इतना कहकर अपनी जादुई छड़ी घुमाई और गायब हो गई।बड़ी रानी ने परी के कहे अनुसार पहली डुबकी लगाई, तो उनका रंग साफ हो गया।दूसरी डुबकी लगाने पर वह सुंदर वस्त्र और गहनों से सज गईं।तीसरी डुबकी लगाते ही उनके बाल लंबे, घने और चमकदार हो गए।अब बड़ी रानी बेहद सुंदर हो चुकी थीं। इसके बाद उन्होंने अनार का एक फल तोड़ा। फल तोड़ते ही वह फूट गया और उसमें से सैनिक निकल आए। उन सैनिकों ने तुरंत एक पालकी तैयार की और बड़ी रानी को सम्मान के साथ राजमहल ले गए।महल पहुंचकर बड़ी रानी ने राजा को पूरी घटना सुनाई। राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने छोटी रानी को महल से निकाल दिया।छोटी रानी ने यह सब छिपकर सुन लिया। वह भी नदी के पास गई और अनार के पेड़ के नीचे बैठकर रोने लगी। उसकी आवाज सुनकर नन्ही परी फिर प्रकट हुई और उससे रोने की वजह पूछी।छोटी रानी ने झूठ बोलते हुए कहा,“मुझे भी बड़ी रानी की तरह राजा ने महल से बाहर निकाल दिया है।”परी ने छोटी रानी से भी वही कहा, “नदी में तीन बार डुबकी लगाओ और अनार तोड़ लो। लेकिन जितना कहा है उतना ही करना।”
छोटी रानी ने पहली डुबकी लगाई, तो उसका रंग और भी निखर गया।
दूसरी डुबकी लगाने पर वह भी सुंदर कपड़ों और गहनों से सज गई।
तीसरी डुबकी के बाद उसके बाल लंबे और घने हो गए।
अब वह पहले से भी ज्यादा सुंदर लग रही थी। लेकिन उसने सोचा,
“अगर तीन डुबकियों से इतना सुंदर हो गई हूं, तो और डुबकियां लगाने से और भी सुंदर हो जाऊंगी।”
लालच में आकर उसने कई डुबकियां लगा लीं। इसका परिणाम यह हुआ कि उसके सभी कपड़े पुराने और फटे हुए हो गए, गहने गायब हो गए, और उसका रंग काला पड़ गया। शरीर पर दाग और दाने निकल आए।
हैरान परेशान छोटी रानी ने अनार तोड़ा, लेकिन अनार से सांप निकल आया और उसने छोटी रानी को डस लिया।
कहानी से शिक्षा
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि लालच और झूठ बोलने से हमेशा नुकसान होता है। दूसरों के प्रति गलत सोचने से हमारी ही हानि होती है। सत्य और संतोष का मार्ग ही जीवन में सफलता और सुख का असली रास्ता है।
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