गहरी नर्मदा न गेहरो पानी निमाड़ी लोकगीत

गहरी नर्मदा न गेहरो पानी


गहरी नर्मदा न गेहरो पानी
गहरी नर्मदा न गेहरो पानी,
ओ गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैया पार लगाऊजो।

काम क्रोध काच मच बसत है,
ए लोभ को मगर देखाय हो,
मैया पार लगाऊजो,
गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैया पार लगाऊजो।

सत की नाव केवटीया सतगुरु,
सुमिरण नाम आधार हो,
मैया पार लगाऊजो,
गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैया पार लगाऊजो।

धर्मी धर्मी पार उतरिया,
पापी डूबियाँ मजधार हो,
मैया पार लगाऊजो,
गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैया पार लगाऊजो।

गहरी नर्मदा न गेहरो पानी,
ओ गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैया पार लगाऊजो।

नर्मदा नदी भारत की पवित्र नदी है, जिसे जीवनदायिनी माना गया है। इसे रेवा के नाम से भी जाना जाता है और यह विंध्याचल और सतपुड़ा पहाड़ियों के बीच बहती है। नर्मदा के दर्शन मात्र से पापों का नाश हो जाता है। यह एकमात्र ऐसी नदी है जिसकी परिक्रमा की जाती है, जो आध्यात्मिक साधना का प्रतीक है। नर्मदा का जल शुद्ध और निर्मल माना गया है, जो हमारे जीवन को पवित्रता और शांति प्रदान करता है।


मां नर्मदा भजन | गेहरी नरबदा न गेहरो पानी | Gehri Narbada N Gehro Pani | गायक कथावाचक अश्विन यदुवंशी

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निमाड़ी लोकगीत
गायक: कथावाचक श्री आश्विन यदुवंशी

Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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