मिथिला का कण कण खिला जमाई भजन
मिथिला का कण कण खिला जमाई राजा राम विवाह गीत
मिथिला का कण-कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
जनक सुता संग रहो ऐसे,
कनक कली पर भंवरा जैसे
राम चंदा चकोरी सिया,
जमाई राजा राम मिला।
कनक अटारी जनक दुलारी,
निरख रही तोहे धनुधारी
लेके पलकों में तुमको छिपा,
जमाई राजा राम मिला।
पति-पत्नी व्रत धर्म निभाना,
दोनों कुलों का मान बढ़ाना
अब दुनिया का होगा भला,
जमाई राजा राम मिला।
मिथिला का कण-कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
जमाई राजा राम मिला।
जनक सुता संग रहो ऐसे,
कनक कली पर भंवरा जैसे
राम चंदा चकोरी सिया,
जमाई राजा राम मिला।
कनक अटारी जनक दुलारी,
निरख रही तोहे धनुधारी
लेके पलकों में तुमको छिपा,
जमाई राजा राम मिला।
पति-पत्नी व्रत धर्म निभाना,
दोनों कुलों का मान बढ़ाना
अब दुनिया का होगा भला,
जमाई राजा राम मिला।
मिथिला का कण-कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
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आज मिथिला का कण कण खिला,
जमाई राजा राम मिला,
जमाई राजा राम मिला,
आज मिथिला का कण कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
जनक सुति संग तुम रहियो ऐसे,
कनक कली पर भंवरा हो जैसे,
रामचंद्र चकोरी सिया,
जमाई राजा राम मिला,
आज मिथिला का कण कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
बने दूल्हा जब देखो भगवान की,
दुल्हन बनी सिया जानकी,
जैसे दूल्हा अवध बिहारी,
वैसी दुल्हन जनक दुलारी,
जाऊं तन मन से बलिहारी,
मंशा पूरण भई सबके अरमान की,
दुल्हन बनी सिया जानकी।
सांची कहो मेरे लाला लखन जी,
अब के मिलन कब होय मोरे लाल,
सांची कहो लाला सुकुमार,
अब कब हुई हैं आवन तुम्हार,
हम सब साली लगे तुम्हार,
तुम सब जीजा लागो हमार,
हमरे लगाई बीरा चाव लखन जु,
अब के मिलन कब होय मोरे लाल,
सांची कहो मेरे लाला लखन जु,
अब के मिलन कब होय मोरे लाल।
जमाई राजा राम मिला,
जमाई राजा राम मिला,
आज मिथिला का कण कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
जनक सुति संग तुम रहियो ऐसे,
कनक कली पर भंवरा हो जैसे,
रामचंद्र चकोरी सिया,
जमाई राजा राम मिला,
आज मिथिला का कण कण खिला,
जमाई राजा राम मिला।
बने दूल्हा जब देखो भगवान की,
दुल्हन बनी सिया जानकी,
जैसे दूल्हा अवध बिहारी,
वैसी दुल्हन जनक दुलारी,
जाऊं तन मन से बलिहारी,
मंशा पूरण भई सबके अरमान की,
दुल्हन बनी सिया जानकी।
सांची कहो मेरे लाला लखन जी,
अब के मिलन कब होय मोरे लाल,
सांची कहो लाला सुकुमार,
अब कब हुई हैं आवन तुम्हार,
हम सब साली लगे तुम्हार,
तुम सब जीजा लागो हमार,
हमरे लगाई बीरा चाव लखन जु,
अब के मिलन कब होय मोरे लाल,
सांची कहो मेरे लाला लखन जु,
अब के मिलन कब होय मोरे लाल।
मिथिला का कण कण खिला - मैथिली ठाकुर
मिथिला क्षेत्र का धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा और समृद्ध है। यह क्षेत्र माता सीता की जन्मस्थली के रूप में प्रसिद्ध है, जो हिंदू धर्म में विशेष श्रद्धा का केंद्र है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जनकपुर (वर्तमान में नेपाल में स्थित) राजा जनक की राजधानी थी, जहां माता सीता का पालन-पोषण हुआ और यहीं उनका विवाह भगवान श्रीराम से संपन्न हुआ। मिथिला की धार्मिक महत्ता इसके अनेक तीर्थस्थलों से भी प्रकट होती है। जनकपुरधाम, जहां जानकी मंदिर स्थित है, श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। इसके अतिरिक्त, धनुषाधाम वह स्थान है जहां भगवान राम द्वारा तोड़े गए शिवधनुष के अवशेष माने जाते हैं।
मिथिला महात्म्य के अनुसार, मिथिलापुरी की यात्रा का विशेष पुण्यफल माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस क्षेत्र की यात्रा करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है, और यहां मुण्डन, उपवास और निवास से विशेष लाभ होता है। मिथिला प्राचीन भारत का एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक क्षेत्र है, जो वर्तमान में भारत के बिहार और झारखंड राज्यों के साथ-साथ नेपाल के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है।
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मिथिला महात्म्य के अनुसार, मिथिलापुरी की यात्रा का विशेष पुण्यफल माना गया है। ऐसा विश्वास है कि इस क्षेत्र की यात्रा करने से अनंत फल की प्राप्ति होती है, और यहां मुण्डन, उपवास और निवास से विशेष लाभ होता है। मिथिला प्राचीन भारत का एक समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक क्षेत्र है, जो वर्तमान में भारत के बिहार और झारखंड राज्यों के साथ-साथ नेपाल के कुछ हिस्सों में फैला हुआ है।
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भजन भगवान राम और माता सीता के पवित्र विवाह का उल्लासपूर्ण वर्णन करता है। जब राम सीता के जीवन में आए, तब संपूर्ण मिथिला आनंदित हो उठा, जैसे वसंत ऋतु में पुष्प खिल उठते हैं। इसमें राम और सीता के रिश्ते को चकोर-चंद्रमा और भंवरा-कली की सुंदर उपमाओं से दर्शाया गया है। भजन यह भी सिखाता है कि पति-पत्नी को अपने धर्म और कर्तव्यों का पालन कर दोनों कुलों का सम्मान बढ़ाना चाहिए, जिससे समाज का भी कल्याण हो। भगवान राम के मिथिला में आगमन से वहां के हर कण में नई ऊर्जा और उमंग का संचार हो गया।
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Author - Saroj Jangir
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