बड़े बन ठन के निकले बिहारी कृष्णा भजन

बड़े बन ठन के निकले बिहारी ये बताओं कहाँ जा रहे हो भजन

 
बड़े बन ठन के निकले बिहारी कृष्णा भजन

बोल बांके बिहारी लाल की...... 
बड़े बन ठन के निकले बिहारी-४ 
ये बताओं कहाँ जा रहे हो -२ 
बड़े बन ठन के निकले बिहारी,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो। 

ये बताओं कहाँ जा रहे हो,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो,
बड़े बन ठन के निकले बिहारी,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो। 

तेरे भक्तों ने तुझको बुलाया,
तेरे भक्तों ने तुझको बुलाया,
किन भक्तों के घर जा रहे हो,
तेरे भक्तों ने तुझको बुलाया,
किन भक्तों के घर जा रहे हो,
इतना बन ठन के निकले बिहारी,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो। 

तुम हाथों में मेहंदी लगाए, 
और अधरों पर मुरली सजाये,
अब मुरली बजा के कन्हैया,
ये बताओ कहाँ जा रहे हो, 
इतना बन ठन के निकले बिहारी,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो। 

तेरे भक्तों ने कीर्तन कराया,
और कीर्तन में सबको बुलाया,
तेरे भक्तों ने कीर्तन कराया,
और कीर्तन में तुमको बुलाया,
तुम कीर्तन में आके कन्हैया,
ये बताओं किधर जा रहे हो। 
तेरे भक्तों ने तुमको बुलाया,
किन भक्तों के घर जा रहे हो। 

तुम पैरों में घुंघरू बँधाये,
और खन खन के घुंघरू बजाये,
तुम पैरों में घुंघरू बँधाये,
और खन खन के घुंघरू बजाये,
तुम रास रचाने कन्हैया,
तुम रास रचाने कन्हैया,
ये बताओ किधर जा रहे हो। 

पीला पटका कमर में बँधाये,
और मुकुट को सर पे सजाये,
काली कमली, काली कमली,
काली कमली को काँधे पे डाले,
ये बताओ किधर जा रहे हो। 

बोल बांके बिहारी लाल की...... 
बड़े बन ठन के निकले बिहारी-४ 
ये बताओं कहाँ जा रहे हो -२ 
बड़े बन ठन के निकले बिहारी,
ये बताओं कहाँ जा रहे हो। 


बड़े बन ठन के निकले बिहारी, ये बताओ कहाँ जा रहे हो | Alka Goyal Ji Bhajan | Hindi Bhajan | Aaradhya Bade Ban Than Ke Nikale Bihari Bhajan

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☛ Bhajan: बड़े बन ठन के निकले बिहारी, ये बताओ कहाँ जा रहे हो
☛ Singer: Didi Alka Goyal Ji
(C) Copyright: Aaradhya
☛ Digital Partner: Tubros Technologies (+91 - 62397 44230)
 
बांके बिहारी लाल बन ठन कर निकल पड़े हैं, पीला पटका कमर में बांधे, मुकुट सिर पर सजाए, काली कमली कंधे पर डाले। हाथों में मेहंदी लगी, अधरों पर मुरली सजी, पैरों में घुंघरू खनक रहे, रास रचाने को आतुर लगते हैं। भक्तों ने कीर्तन गाकर बुलाया, फिर भी पूछते हैं किधर जा रहे हो कन्हैया, किन भक्तों के घर रवाना हो। ये सज धज देखकर मन झूम उठता है, प्रेम की लीला में खो जाना स्वाभाविक है।

बडे बन ठन के निकले बिहारी ।
ये बताओ कहा जा रहे हो।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

मेरे भगतो ने मुझेको बुलाया।
अपने भगतों के घर जा रहे है-2।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

तुम हाथों मे मेहंदी लगाए
और अधरो पे मुरली सजाए।
अब मुरली बजाने कन्हैया-2।
ये बताओ कहा जा रहे हो।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

मेरे भगतों ने भागवत कराया
और भागवत मे मुझको बुलाया।
भागवत मे सुनाई मेरी गाथा।
मै तो दर्शन दिखाने जा रहा हूँ-2।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

तेरे पैरों मे घुंघरू बंधा है
और छन छन ये घुंघरू बजाए।
तुम रास रचाने कन्हैया-2 ।
ये बताओ कहा जा रहे हो।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

पीला पटका कमर पे बंधा के
मोर मुकुट को सिर पे सजा के।
काली कम्बली को कांधे पे सजा के-2।
ये बताओ कहा जा रहे हो।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

शिव शक्ति मन्दिर मे किर्तन रचाया
नाम ले ले के तुझको बुलाया।
अपने भगतो संग रास रचाने-2।
मेरी राधे वहां जा रहा हूँ।
ये बताओ कहा जा रहे हो।

भक्तों की पुकार सुनकर भी शरारत करते हैं वो, इतना सजा कर निकल पड़े तो कौन न दीवाना हो जाए। कीर्तन की धुन में घुंघरू बजाते, मुरली की तान छेड़ते, हर कदम पर आकर्षण बिखेरते। जीवन में ऐसी लीला हो तो दुख कहाँ ठहर पाते, बस आनंद की बाढ़ आ जाती। दिल कहता है आवो बिहारी, यहीं रुक जाओ, ये प्रेम का बंधन तोड़ना मुश्किल है ना।
Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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