मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली भजन

मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली भजन


मैं तो राधे राधे बोलूँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,
मोहन संग होली खेलूँगी,

कान्हा संग होली खेलूँगी,
मोहन संग होली खेलूँगी,

मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी नंद गाँव में,
नंद गाँव में जी नंद गाँव में,
एक दिन खेलूँगी नंद गाँव में,

माँ यशोदा से मिल के आऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी बरसाने में,
बरसाने में जी बरसाने में,
एक दिन खेलूँगी बरसाने में,

राधा प्यारी से मिल के आऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी गोवर्धन में,
गोवर्धन में जी गोवर्धन में,
एक दिन खेलूँगी गोवर्धन में,

गिरिराज के दर्शन पाऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी बृज मण्डल में,
बृज मण्डल में जी बृज मण्डल में,
एक दिन खेलूँगी बृज मण्डल में,

परिक्रमा करके आऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी वृन्दावन में,
वृन्दावन में जी वृन्दावन में,
एक दिन खेलूँगी वृन्दावन में,

बिहारी जी को रंग लगाऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी मैं गोकुल में,
मैं गोकुल में मैं गोकुल में,
एक दिन खेलूँगी मैं गोकुल में,

नंद बाबा से मिल के आऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी,

एक दिन खेलूँगी दाऊ जी में,
दाऊ जी में बल दाऊ जी में,
एक दिन खेलूँगी दाऊ जी में,

बलराम जी से मिल के आऊँगी,
कान्हा संग होली खेलूँगी,
मैं तो राधे राधे बोलूँगी।



मैं तो राधे राधे बोलूँगी कान्हा संग होली खेलूँगी - होली स्पेशल भजन #कृष्णभजन #bhajan#Holi #krishna

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मन में ब्रज की होली का रंगीन, पावन और प्रेम से भरा दृश्य सजीव हो उठता है, जहाँ साधक हर पल राधा नाम जपते हुए केवल कान्हा के संग रास और होली खेलने की अभिलाषा रखता है। नंदगांव, बरसाना, गोवर्धन, वृंदावन, गोकुल और समूचे बृजमंडल की परिक्रमा करने, वहाँ की रज को मस्तक पर लगाने, यशोदा मैया, नंद बाबा, बलराम जी और राधा रानी के सान्निध्य का सुख लेने की तीव्र लालसा हृदय को भिगो देती है। हर स्थान पर बस यही भावना है कि किसी भी रूप में, किसी भी बहाने, कान्हा के अधिक निकट हो जाए, उनके साथ रंग और प्रेम की होली खेल सके, और जीवन निरंतर राधे‑राधे नाम के रस में डूबा रहे।

श्रीकृष्ण ब्रज के कन्हैया, गोकुल के नंदलाल और वृंदावन बिहारी रूप में जितने सरल और बालसुलभ दिखते हैं, उतने ही गहरे, असीम और अद्वितीय ईश्वर रूप में हैं। उनके संग खेली जाने वाली होली केवल रंगों की नहीं, पूर्ण आत्मसमर्पण, प्रेम, विश्वास और आनंद की होली है, जिसमें राधा रानी साक्षात् प्रेम की अधिष्ठात्री बनकर साथ खड़ी रहती हैं। नंदगांव की गलियाँ, बरसाने की कुंजें, गोवर्धन की गोद और वृंदावन की रज, सब उनके चरणों की महिमा से पवित्र हैं; वहाँ का प्रत्येक कण, प्रत्येक वायु कण्हा‑राधा के नाम से सराबोर है। जो साधक इन स्थानों को मन से प्रणाम करता है और नाम का जप करता है, वह भीतर ही भीतर ऐसा अनुभव करता है मानो सचमुच कान्हा के संग होली खेल रहा हो, यही राधा‑कृष्ण की करुणा और महिमा की सबसे मधुर अनुभूति है।
 
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Saroj Jangir Author Author - Saroj Jangir

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