भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो शिव भजन
भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो शिव भजन
भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो
गङ्गाधर शंकर करुणाकर मामव भवसागर तारक
निर्गुण परब्रह्म स्वरुप गमगम भूत प्रपञ्चा रहित
निज गुहानिहित नितान्त अनन्त आनन्द अतिशय अक्सयलिङ्ग
धिमित धिमित धिमि धिमिकित किततों तों तों तरिकित तरिकितकित तों
मातङ्ग मुनिवर वन्दिता इष सर्व दिगंबर वेस्तित
वेस इष सबेष नित्य निरञ्जन नित्य न अतेष इष सबेष सर्वेश
Voh Shambho Shiv Shambho Svayambho
Gangaadhar Shankar Karunaakar Mam Bhavasaagar Taarak
Nirgun Parabrahm Svaroop Gaamagam Bhoot Prapanch Rahit
Bilkul Apanee Guphaon Ke Saath Anant Aanand
Dheema, Dheema, Dheema, Dheema, Dheema, Dheema, Dheema, Dheema, Dheema
Maatanga Munivar Vandita Eesh Sarv Digambar Vastith
Ves Eesh Sabesh Nity Niranjan Nity Na Athesh Eesh Sab Sarvesh
Bho Shambo Shiva Shambo by Lakshmy Ratheesh & Radhika Venugopal
Camera & Editing - Charles Prithvi Raj
Assistant Camera - Vinodh Raja , Vishal Kumar Gowda
Lighting - Dharani
Directors -Jananee & Sandhya Menon
Produced by Ratheesh Krishnakumar (SWARANG)
जब मन थका-मंदा हो जाता है, दुनिया की भागदौड़ से चूर हो जाता है, तो बस एक नाम गूँज उठता है—भो शंभो, शिव शंभो, स्वयंभू। वो गंगाधर जो जटाओं में गंगा को बसा लेते हैं, वो शंकर जो करुणा का सागर हैं, वो भवसागर से पार उतारने वाले तारक। निर्गुण परब्रह्म का वो स्वरूप जो सब कुछ से परे है, भूत-प्रपंच से रहित, निज गुहा में छिपा हुआ, अनंत आनंद से भरा, कभी क्षीण न होने वाला अक्षय लिंग। धिमित-धिमित की वो थाप, धिमि-धिमिकित-कित-तों-तों-तरिकित-तरिकित-कित-तों की लय, जैसे डमरु की आवाज में सारी सृष्टि नाच रही हो।
मातंग मुनि जैसे महान ऋषि भी जिनकी वंदना करते हैं, वो दिगंबर जो दिशाओं को ही वस्त्र बना लेते हैं, नित्य निरंजन, नित्य निराकार, सबके स्वामी, सबमें समाए हुए। वो शंभो जो स्वयंभू हैं, खुद से प्रकट हुए, किसी के बनाए नहीं। बस पुकारो तो वो करुणा बरसाते हैं, भवसागर की लहरों से पार कर देते हैं, मन को वो अनंत आनंद में डुबो देते हैं। आप सभी पर ईश्वर की कृपा बनी रहे। जय श्री शिव जी की।
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